गाजियाबाद के एक मॉल में पहनावे को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि एक मुस्लिम दुकानदार को अपनी दुकान खाली करनी पड़ी.

गाजियाबाद के जीटी रोड स्थित ओपुलेंट मॉल में पहनावे के आधार पर भेदभाव का शर्मनाक मामला सामने आया है. यहां एक मुस्लिम शख्स को सिर्फ कुर्ता-पायजामा पहनने की वजह से दुकान नहीं चलाने दी गई. इस भेदभाव का आरोप मॉल प्रबंधन पर लगा है. मॉल प्रबंधन का कहना है कि वे लोग कुर्ते-पायजामे में कारोबार की अनुमति नहीं दे सकते. पीड़ित शख्स ने मामले में पुलिस को भी गुहार लगाई लेकिन अभी तक पुलिस की ओर से किसी कार्रवाई के संकेत नहीं मिले हैं. वहीं जब एसएचओ को इस मामले पर कार्रवाई के बारे में पूछा तो उन्होंने रिपोर्टर को धमकाया और कहा कि वे ‘कट्टर हिंदू’ हैं.
ग्रेटर नोएडा निवासी मोहम्मद सैफुल्ला ने 15 अक्टूबर 2025 को ₹25,000 मासिक किराए पर एक दुकान ली थी, जिसके लिए 11 महीने का एग्रीमेंट भी किया गया था। 29 अक्टूबर को उन्होंने खुशी-खुशी दुकान का उद्घाटन कर व्यापार शुरू किया, लेकिन अगले ही दिन मॉल प्रबंधन ने उनके भाई फैज़ के पहनावे—कुर्ता-पायजामा, टोपी और दाढ़ी—पर आपत्ति जताते हुए दुकान संचालन पर रोक लगा दी।

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि मॉल मैनेजमेंट ने स्पष्ट तौर पर कहा कि इस तरह के पहनावे में व्यापार करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके बाद 5 नवंबर को जब दोबारा दुकान खोली गई, तो फिर से मैनेजमेंट के लोग पहुंचे और कथित तौर पर गाली-गलौज करते हुए दुकान बंद करवा दी। सैफुल्ला का कहना है कि उन्हें लगातार मानसिक दबाव और बदसलूकी का सामना करना पड़ा, जिसके चलते उनकी दुकान लंबे समय तक बंद रही।

मामले में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। पीड़ितों ने डायल 112 पर कॉल कर पुलिस को बुलाया, लेकिन उनका आरोप है कि पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और उन्हें थाने जाकर मामला सुलझाने की सलाह देकर लौट गई। जब थाना सिहानी गेट के एसएचओ कुलदीप दीक्षित से इस बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए खुद को “कट्टर हिंदू” बताया, जिससे विवाद और बढ़ गया।
वहीं, मॉल प्रबंधन का कहना है कि यह मामला किसी धर्म विशेष से नहीं, बल्कि ड्रेस कोड और मॉल के “कल्चर” से जुड़ा हुआ है। उनके अनुसार, सभी कर्मचारियों के लिए यूनिफॉर्म अनिवार्य है और फैज़ को केवल पैंट-शर्ट पहनने की सलाह दी गई थी। प्रबंधन का यह भी दावा है कि पीड़ित पक्ष ने इस मुद्दे को बेवजह धार्मिक रंग दिया।
पीड़ित के वकील मुजीब उर रहमान का कहना है कि यह मामला मौलिक अधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा है। उनका तर्क है कि किसी व्यक्ति को उसके पहनावे या धार्मिक पहचान के आधार पर रोका नहीं जा सकता और इस पूरे घटनाक्रम से पीड़ित परिवार को आर्थिक व मानसिक नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई होनी चाहिए।
इसके अलावा, पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया है कि दुकान बंद रहने के बावजूद उन्हें करीब ₹16,000 का बिजली बिल थमा दिया गया और भुगतान न करने पर सामान निकालने से रोकने की धमकी दी गई। लगातार हो रहे विवाद और दबाव के चलते अंततः सैफुल्ला को दुकान खाली करने का फैसला लेना पड़ा।
पुलिस पर भी सवाल
पीड़ित पक्ष ने डायल 112 पर कॉल कर पुलिस बुलाई, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया।
जब थाना सिहानी गेट के SHO कुलदीप दीक्षित से इस मामले में सवाल किया गया, तो उन्होंने कथित तौर पर कहा—
“मैं कट्टर हिंदू हूं… देश के लिए काम करो, ये सब मत करो।”
इस बयान ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
यह पूरा मामला अब केवल एक दुकान के विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह नागरिक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता और प्रशासनिक निष्पक्षता से जुड़े बड़े सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या पीड़ित पक्ष को न्याय मिल पाता है।
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दानिश अतीक पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 9 सालों से हैं. इस समय वह इनसाइड न्यूज़ 24x7 में बतौर न्यूज़ डिर्टेक्टर और रिपोर्टर का काम कर रहे हैं. इससे पहले दानिश अतीक फोटोप्लेयर न्यूज़ में न्यूज डेस्क पर काम कर चुके हैं. उन्हें राजनीति, क्राइम और खेल पर लिखना बेहद पसंद है. दानिश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं, इन्होंने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई लखनऊ यूनिवर्सिटी से की है.
