7 साल बाद भारत आ रहा दुनिया का सबसे सस्ता तेल, ईरान के खार्ग से 9.5 करोड़ लीटर वाडिनार पोर्ट पहुंचेगा


अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पहली बार 2022 के बाद 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई थीं. जो तब से लगातार इससे ऊपर बनी हुई हैं. पर ईरान का ये तेल अब भी बहुत सस्ता है. 4 अप्रैल को यह तेल गुजरात के वाडिनार पोर्ट पर पहुंच जाएगा.

मिडिल-ईस्ट में चल रहे युद्ध और इसकी वजह से कच्चे तेल की लगातार बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बीच भारत के लिए एक बहुत बड़ी राहत की खबर आई है. करीब 7 साल के बाद भारत में ईरान से कच्चे तेल की पहली खेप पहुंचने वाली है, जो सीधे गुजरात के वाडिनार पोर्ट पर 4 अप्रैल को पहुंचेगी. यह वही तेल है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सबसे सस्ते विकल्पों में गिना जाता है और भारतीय रिफाइनरियों के लिए हमेशा से फायदे का सौदा रहा है.

शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, पिंग शुन नाम का एक अफ्रामैक्स टैंकर ईरान के खार्ग आइलैंड से करीब 6 लाख बैरल यानी लगभग 9.5 करोड़ लीटर कच्चा तेल लेकर भारत की ओर बढ़ रहा है.

इस जहाज ने मार्च की शुरुआत में लोडिंग की थी और करीब एक महीने की यात्रा के बाद यह भारत पहुंचने वाला है.

यह डिलीवरी इसलिए भी बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि मई 2019 के बाद यह पहली बार है जब भारत में ईरान से तेल आ रहा है. उस समय अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों के कारण भारत समेत कई देशों को ईरानी तेल आयात रोकना पड़ा था. लेकिन अब हालात बदले हैं. अमेरिका ने हाल ही में 30 दिन की एक अस्थायी छूट दी है, जिसके तहत समुद्र में पहले से मौजूद ईरानी तेल को खरीदा जा सकता है.

कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म क्लेपर के अनुसार, यह डील ऐसे समय में हो रही है जब भारतीय रिफाइनरियों के पास स्टॉक कम हो रहा है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं. ऐसे में सस्ता ईरानी तेल भारत के लिए एक बड़ी राहत बन सकता है.

कौन खरीदेगा यह ईरानी तेल?

ईरान का खार्ग आइलैंड उसकी तेल सप्लाई का सबसे बड़ा केंद्र है, जहां से करीब 90 प्रतिशत निर्यात होता है. लेकिन यह इलाका मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के चलते संवेदनशील बना हुआ है. हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो इस तेल टर्मिनल को निशाना बनाया जा सकता है.

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस तेल को खरीदेगा कौन. वाडिनार में रूस समर्थित नायरा एनर्जी की बड़ी रिफाइनरी है, लेकिन उसके मेंटेनेंस में जाने की संभावना है. ऐसे में माना जा रहा है कि इंडियन ऑयल या भारत पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियां इस खेप को खरीद सकती हैं.

सस्ता है, फिर ईरान से तेल क्यों नहीं खरीद रहा भारत? 

2019 तक भारत, ईरान के तेल का एक बड़ा ग्राहक रहा है. एक समय ऐसा था जब भारत के कुल तेल आयात में ईरान की हिस्सेदारी करीब 11.5 प्रतिशत तक पहुंच गई थी. ईरानी तेल की खासियत यह है कि यह भारतीय रिफाइनरियों के लिए तकनीकी रूप से अनुकूल है और इसके व्यापारिक शर्तें भी काफी लचीली रही हैं.

2018 में जब अमेरिका ने ईरान पर दोबारा प्रतिबंध लगाए, तो भारत को मजबूरन अपने आयात बंद करने पड़े. इसके बाद भारत ने सऊदी अरब, इराक, अमेरिका और रूस जैसे देशों से तेल खरीद बढ़ा दी. लेकिन अब एक बार फिर ईरान की वापसी की संभावना बनती दिख रही है.

रूस के साथ ही वेनेजुएला से भी हो रही तेल की खरीद 

दिलचस्प बात यह भी है कि भारत ने हाल ही में वेनेजुएला से भी तेल आयात फिर शुरू किया है और रूस से खरीदारी अपने चरम पर पहुंच गई है. ऐसे में भारत अब अलग-अलग स्रोतों से सस्ता तेल जुटाकर अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है.

हालांकि एक बड़ी चुनौती अभी भी बनी हुई है और वह है भुगतान का तरीका. ईरान अभी भी स्विफ्ट सिस्टम से बाहर है, जिससे अंतरराष्ट्रीय भुगतान करना मुश्किल हो जाता है. पहले यूरो के जरिए एक तीसरे देश के बैंक से भुगतान किया जाता था, लेकिन अब वह रास्ता भी लगभग बंद हो चुका है.

फिलहाल यह साफ है कि 4 अप्रैल को वाडिनार पोर्ट पर पहुंचने वाला यह टैंकर सिर्फ एक तेल खेप नहीं, बल्कि भारत-ईरान ऊर्जा संबंधों की नई शुरुआत का संकेत भी है. अगर हालात अनुकूल रहते हैं, तो आने वाले महीनों में भारत ईरान से बड़े पैमाने पर तेल खरीद फिर शुरू कर सकता है.

About the Reporter

Journalist at Inside News 24x7 | Website | + posts

दानिश अतीक पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 9 सालों से हैं. इस समय वह इनसाइड न्यूज़ 24x7 में बतौर न्यूज़ डिर्टेक्टर और रिपोर्टर का काम कर रहे हैं. इससे पहले दानिश अतीक फोटोप्लेयर न्यूज़ में न्यूज डेस्क पर काम कर चुके हैं. उन्हें राजनीति, क्राइम और खेल पर लिखना बेहद पसंद है. दानिश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं, इन्होंने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई लखनऊ यूनिवर्सिटी से की है.


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *