
लखनऊ में निजी स्कूलों की मनमानी और लगातार बढ़ती फीस को लेकर अभिभावकों के विरोध के बीच अब जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। बीते कुछ समय से शहर के कई हिस्सों में अभिभावक निजी स्कूलों द्वारा मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने, बार-बार यूनिफॉर्म बदलने और महंगी निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के दबाव को लेकर नाराज़गी जता रहे थे। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने जिला शुल्क नियामक समिति की एक अहम बैठक आयोजित की, जिसकी अध्यक्षता जिलाधिकारी विशाख जी. ने की। बैठक में साफ तौर पर यह संदेश दिया गया कि शिक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार की मनमानी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
प्रशासन द्वारा लिए गए फैसलों के तहत अब कोई भी निजी स्कूल लगातार पांच शैक्षणिक वर्षों तक अपनी यूनिफॉर्म में बदलाव नहीं कर सकेगा। यह कदम खासतौर पर उन अभिभावकों को राहत देने के लिए उठाया गया है, जो हर साल यूनिफॉर्म बदलने की वजह से आर्थिक बोझ झेल रहे थे। इसके अलावा, जिन स्कूलों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू है, वहां केवल एनसीईआरटी की किताबों से ही पढ़ाई कराना अनिवार्य कर दिया गया है। निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों को अनिवार्य करने पर भी रोक लगा दी गई है, जिससे अभिभावकों को अनावश्यक खर्च से बचाया जा सके।
फीस वृद्धि को लेकर भी प्रशासन ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब कोई भी स्कूल मनमाने तरीके से फीस नहीं बढ़ा सकेगा। यदि कोई स्कूल फीस बढ़ाना चाहता है, तो उसे पहले उसका प्रस्ताव प्रस्तुत करना होगा, जिसकी गहन जांच की जाएगी। जांच में यदि कोई अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित स्कूल पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं, गंभीर मामलों में स्कूल की मान्यता या एनओसी तक रद्द करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
अभिभावकों की समस्याओं के समाधान के लिए शिकायत प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है। अब अभिभावक सीधे अपर जिलाधिकारी ज्योति गौतम और जिला विद्यालय निरीक्षक से संपर्क कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इससे शिकायतों के त्वरित निस्तारण की उम्मीद जताई जा रही है। इसके साथ ही पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी फीस संरचना का पूरा विवरण अपनी आधिकारिक वेबसाइट और स्कूल के नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करें। हर प्रकार के भुगतान की रसीद देना अनिवार्य होगा और तय फीस के अलावा किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जा सकेगा।
कुल मिलाकर, जिला प्रशासन के इन सख्त कदमों से अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है और निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगने की संभावना भी बढ़ गई है।
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दानिश अतीक पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 9 सालों से हैं. इस समय वह इनसाइड न्यूज़ 24x7 में बतौर न्यूज़ डिर्टेक्टर और रिपोर्टर का काम कर रहे हैं. इससे पहले दानिश अतीक फोटोप्लेयर न्यूज़ में न्यूज डेस्क पर काम कर चुके हैं. उन्हें राजनीति, क्राइम और खेल पर लिखना बेहद पसंद है. दानिश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं, इन्होंने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई लखनऊ यूनिवर्सिटी से की है.
