यूपी में कितने वोटरों के नाम कटे, सबसे ज्यादा लखनऊ में कटे 12 लाख नाम, चुनाव आयोग ने बताई इसकी बड़ी वजह, SIR की हर बड़ी बात जानिए


यूपी में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में कुल 2 करोड़ 89 लाख नाम कटे हैं. पिछले साल 27 अक्टूबर की मतदाता सूची में 15 करोड़ 44 लाख 30 हजार 92 मतदाता थे. मसौदा सूची में लगभग 2.89 करोड़ मतदाताओं को गिनती के दौरान शामिल नहीं किया जा सका है. इसमें राज्य के सभी 75 जिले और 403 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं.

सबसे बड़ा कारण लखनऊ में 30.04% जनगणना प्रपत्र प्राप्त नहीं हुए, जो इस बड़ी कटौती का एक प्रमुख तकनीकी कारण माना जा रहा है. सिर्फ राजधानी ही नहीं, बल्कि पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी और बुंदेलखंड के ललितपुर में भी आंकड़ों में बड़ी गिरावट है.

क्या है लखनऊ में इतने नामों के काटे जाने की वजह?

सबसे बड़ा कारण लखनऊ में 30.04% जनगणना प्रपत्र प्राप्त नहीं हुए, जो इस बड़ी कटौती का एक प्रमुख तकनीकी कारण माना जा रहा है. सिर्फ राजधानी ही नहीं, बल्कि पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी और बुंदेलखंड के ललितपुर में भी आंकड़ों में बड़ी गिरावट है. वाराणसी में लगभग 18% मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं. हालांकि, प्रशासन का कहना है कि जिन लोगों के नाम कटे हैं, उनके पास अभी भी फॉर्म 6 भरकर दोबारा जुड़ने का विकल्प मौजूद है. वहीं, ललितपुर में 27 सितंबर 2025 तक यहां 9.5 लाख मतदाता पंजीकृत थे, जो अब घटकर 8.6 लाख रह गए हैं. यह लगभग 9.95% की कमी है.

उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची का ड्राफ्ट आ गया है. वोटर लिस्ट के शुद्धीकरण अभियान में कुल 2.89 करोड़ नामों के नाम कटे हैं. ये कटे वोट कहां चोट करेंगे, अब इसको लेकर सस्पेंस गहरा गया है. बरेली की बात करें तो कुल 21 प्रतिशत यानी 7 लाख 16 हजार 509 मतदाताओं के नाम कटे हैं. सबसे ज्यादा असर बरेली शहर और बरेली कैंट विधानसभा क्षेत्रों में देखा गया है, जहां बड़ी संख्या में मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं. पूरे राज्य की बात करें तो सबसे ज्यादा 12 लाख वोटर लखनऊ में कटे हैं . जानिए यूपी के SIR से जुड़े 10 सवालों के जवाब…

1. SIR के बाद जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में यूपी में कितने वोटर हैं?

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने मंगलवार को संवाददाता सम्मेलन में बताया कि SIR की प्रक्रिया के बाद मसौदा मतदाता सूची में 12 करोड़ 55 लाख 56 हजार 25 मतदाता शामिल हैं.

2. डॉफ्ट वोटर लिस्ट में कितने वोटर कम हुए हैं?

यूपी में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में कुल 2 करोड़ 89 लाख नाम कटे हैं. पिछले साल 27 अक्टूबर की मतदाता सूची में 15 करोड़ 44 लाख 30 हजार 92 मतदाता थे. मसौदा सूची में लगभग 2.89 करोड़ मतदाताओं को गिनती के दौरान शामिल नहीं किया जा सका है. इसमें राज्य के सभी 75 जिले और 403 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं.

3. अगर वोटर लिस्ट में आपका नाम नहीं है तो क्या करें?

सीईओ नवदीप रिणवा ने कहा कि अब मसौदा मतदाता सूची पर दावे और आपत्तियां छह जनवरी से छह फरवरी तक दर्ज कराई जा सकेंगी. इस दौरान लोग सूची में नाम शामिल करने, सुधार करने या आपत्ति करने के लिए आवेदन कर सकते हैं.

4. यूपी में वोटर लिस्ट से 2.89 करोड़ नाम क्यों कटे?

रिणवा ने कहा कि 46.23 लाख मतदाता (2.99%) मृत पाए गए, जबकि 2.57 करोड़ मतदाता (14.06%) या तो स्थायी रूप से बाहर चले गए थे या प्रमाणन की प्रक्रिया के दौरान मौजूद नहीं थे. 25.47 लाख अन्य मतदाताओं का नाम एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत पाया गया.

5. वाराणसी में SIR के बाद कितने वोटरों के नाम कटे हैं?

यूपी में एसआईआर के बाद 12.55 करोड़ मतदाताओं की आज रफ सूची आ गई. बात की जाए वाराणसी की तो यहां 18 प्रतिशत मतदाताओं के नाम कटे हैं, हालांकि उनके पास अभी फॉर्म 6 विकल्प है.

6. यूपी में वोटर लिस्ट का SIR कैसे किया गया?

रिणवा ने बताया कि इस काम में एक लाख 72 हजार 486 बूथ शामिल किए गए थे. इनमें बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) फार्म भरवाने के लिये मतदाताओं तक पहुंचे थे. मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त 5,76,611 बूथ स्तरीय एजेंटों ने भी इस काम में मदद की.

7. चुनाव आयोग ने यूपी में 15 दिन का एक्स्ट्रा टाइम क्यों लिया?

सीईओ ने बताया कि प्रदेश में एसआईआर की कवायद मूल रूप से 11 दिसंबर को खत्म होने वाली थी लेकिन लगभग दो करोड़ 97 लाख मतदाताओं के नाम मसौदा सूची से बाहर हो रहे थे जिसके बाद 15 दिन का अतिरिक्त समय मांगा गया. इसके मद्देनजर निर्वाचन आयोग की मंजूरी से SIR प्रक्रिया की अवधि 26 दिसंबर तक बढ़ा दी गई थी. रिणवा ने बताया कि शुरू में मसौदा मतदाता सूची जारी करने की तारीख 31 दिसंबर तय की गई थी लेकिन अपरिहार्य कारणों से बाद में इसे छह जनवरी कर दिया गया.

8. यूपी में SIR की टाइमलाइन क्या है?

चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के लिए संशोधित तारीखें जारी की थीं, जो 1 जनवरी, 2026 की क्वालिफाइंग तारीख पर आधारित थीं. इसमें मतदाताओं की लिस्ट का फाइनल पब्लिकेशन अब 6 मार्च, 2026 को होना तय है. दावे और आपत्तियां प्राप्त करने की अवधि 6 जनवरी से 6 फरवरी, 2026 तक तय की गई है.

9. यूपी में फाइनल वोट लिस्ट कब आएगी?

नोटिस चरण, फॉर्म गिनने पर निर्णय, दावे और आपत्तियों का निपटारा 6 जनवरी से 27 फरवरी, 2026 तक किया जाएगा. उत्तर प्रदेश की चुनावी लिस्ट का फाइनल पब्लिकेशन 6 मार्च 2026 को किया जाएगा.

10. कैसे पता करें कि मेरा नाम वोटर लिस्ट में है या कट गया है?

कैसे पता करें कि मेरा नाम वोटर लिस्ट में है या कट गया है? सबसे आसान तरीका है voters.eci.gov.in पोर्टल पर जाना. वहां ‘Search in Electoral Roll’ पर क्लिक करें, आप अपने नाम, पिता के नाम या अपने वोटर आईडी (EPIC) नंबर से स्टेटस देख सकते हैं. इसके अलावा ‘Voter Helpline App’ से भी यह जानकारी तुरंत मिल जाएगी.

किस जिले में कितने नाम काटे गए?

  1. सबसे ज्यादा राजधानी लखनऊ में मतदाताओं की संख्या में सबसे चौंकाने वाली गिरावट दर्ज की गई है. जब SIR की घोषणा की गई थी, तब लखनऊ में 39.9 लाख मतदाता थे. ड्राफ्ट लिस्ट के बाद यह संख्या घटकर अब मात्र 27.9 लाख रह गई है.

  2. वाराणसी में लगभग 18% मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं. हालांकि, प्रशासन का कहना है कि जिन लोगों के नाम कटे हैं, उनके पास अभी भी फॉर्म 6 भरकर दोबारा जुड़ने का विकल्प मौजूद है. वहीं, ललितपुर में 27 सितंबर 2025 तक यहां 9.5 लाख मतदाता पंजीकृत थे, जो अब घटकर 8.6 लाख रह गए हैं. यह लगभग 9.95% की कमी है.

  3. बरेली में कुल 21 प्रतिशत यानी 7 लाख 16 हजार 509 मतदाताओं के नाम सूची से कटने का दावा सामने आया है. सबसे ज्यादा असर बरेली शहर और बरेली कैंट विधानसभा क्षेत्रों में देखा गया है, जहां बड़ी संख्या में मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं. ड्राफ्ट लिस्ट के मुताबिक पहले जिले में कुल 34 लाख 5 हजार 64 मतदाता दर्ज थे, जो अब घटकर 26 लाख 91 हजार 67 रह गए हैं. मौजूदा सूची में 14 लाख 82 हजार 546 पुरुष, 12 लाख 8 हजार 468 महिला और 53 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं.

  4. SIR के बाद मुरादाबाद में कुल 20 लाख 71 हजार 844 मतदाता दर्ज किए गए हैं. इनमें से 1 लाख 96 हजार 201 मतदाताओं को लो-मैपिंग की श्रेणी में रखा गया है, जिन्हें नोटिस भेजे जाएंगे. जिन बूथों पर मतदाताओं की संख्या 1200 से अधिक थी, वहां नए बूथ भी बनाए गए हैं, जिनकी सूची सभी राजनीतिक दलों को दे दी गई है.

  5. आंकड़ों के अनुसार, आगरा में 36.71 लाख मतदाताओं में से 9 लाख से अधिक नाम हटाए गए हैं, जिसके बाद अब वहां 27.63 लाख वोटर बचे हैं.

  6. कानपुर में 10 विधानसभा क्षेत्रों से कुल 9,02,148 नाम हटाए गए हैं, जो कुल वोटरों का 25.50% है.

  7. जौनपुर की 9 विधानसभाओं में भी भारी कटौती देखी गई है, जहां जौनपुर सदर से 1,04,501 और मड़ियाहूं से 1,12,686 नाम काटे गए हैं, जबकि शाहगंज, मुंगरा बादशाहपुर और मछलीशहर जैसे क्षेत्रों में भी 50 से 70 हजार के बीच नाम हटाए गए हैं.

  8. बुंदेलखंड और पूर्वांचल के जिलों में भी सुधार का व्यापक असर दिखा है. झाँसी की चार विधानसभाओं में कुल 2,19,612 नाम काटे गए, जिनमें सर्वाधिक 65,905 नाम झांसी सदर से कम हुए हैं.

  9. बांदा में मतदाताओं की संख्या 13.49 लाख से घटकर 11.74 लाख रह गई है, यानी यहां 1.75 लाख नाम हटाए गए. जालौन में 2.12 लाख और गाजीपुर में 4.08 लाख मतदाताओं के नाम लिस्ट से डिलीट हुए हैं.

  10. बलिया में जिला प्रशासन ने करीब 4.50 लाख नाम हटाए हैं, जिसके बाद जिले में अब 20.54 लाख मतदाता ही शेष हैं.

  11. इटावा में भी 2.33 लाख वोटरों की कटौती हुई है, जिससे यहां अब कुल 9,96,613 योग्य मतदाता बचे हैं.

  12. रायबरेली में कुल 3.48 लाख हटाए गए नामों में 67,808 मृतक, 1.70 लाख स्थानांतरित और 29,336 डुप्लीकेट मतदाता शामिल थे. चंदौली में भी 2.30 लाख मतदाता सूची से बाहर हुए हैं.

 

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दानिश अतीक पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 9 सालों से हैं. इस समय वह इनसाइड न्यूज़ 24x7 में बतौर न्यूज़ डिर्टेक्टर और रिपोर्टर का काम कर रहे हैं. इससे पहले दानिश अतीक फोटोप्लेयर न्यूज़ में न्यूज डेस्क पर काम कर चुके हैं. उन्हें राजनीति, क्राइम और खेल पर लिखना बेहद पसंद है. दानिश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं, इन्होंने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई लखनऊ यूनिवर्सिटी से की है.


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