अलीगंज अग्निकांड: एसआईटी रिपोर्ट में अवैध निर्माण और भारी लापरवाही का खुलासा

हर कोने में मिला अवैध निर्माण, जल्द सौंपेगी एसआईटी रिपोर्ट
लखनऊ के अलीगंज स्थित गेमिंग जोन में भीषण आग लगने से 15 लोगों की मौत के मामले की जांच अंतिम चरण में पहुंच गई है। इस हादसे की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) अगले एक-दो दिनों में अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप सकती है। जांच में सामने आया है कि जिस इमारत में गेमिंग जोन और पेट शॉप संचालित हो रहे थे, वहां बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण किया गया था। भवन के विभिन्न हिस्सों में निर्माण मानकों का उल्लंघन मिला है, जिससे आग लगने के बाद हालात बेहद भयावह हो गए। सूत्रों के अनुसार एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) और विद्युत सुरक्षा निदेशालय की गंभीर लापरवाही को भी शामिल किया है। रिपोर्ट में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश किए जाने की संभावना है। जांच में यह भी पाया गया कि भवन की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह नाकाम थी और समय रहते निरीक्षण व कार्रवाई नहीं होने के कारण यह हादसा इतना बड़ा रूप ले सका।
स्वीकृत क्षमता से अधिक बिजली लोड बना हादसे की बड़ी वजह
एसआईटी की जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि भवन का स्वीकृत बिजली लोड केवल 20 किलोवाट था, जबकि वास्तविक उपयोग लगभग 35 किलोवाट तक पहुंच चुका था। अधिक लोड और अनियमित विद्युत व्यवस्था के कारण आग तेजी से फैल गई। जांच में यह भी सामने आया कि बिजली विभाग और ऊर्जा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने लंबे समय तक इस अतिरिक्त लोड को नजरअंदाज किया। नियमित निरीक्षण और कार्रवाई होती तो संभावित खतरे को पहले ही रोका जा सकता था। रिपोर्ट में इस लापरवाही को हादसे के प्रमुख कारणों में शामिल किया गया है। एसआईटी का मानना है कि भवन में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया और विद्युत व्यवस्था की अनदेखी ने आग को विकराल रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बायोमीट्रिक डोर, बंद निकास और एसी यूनिट बने मौत का कारण
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि इमारत में लोगों के सुरक्षित बाहर निकलने के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। भवन में बायोमीट्रिक डोर लगा हुआ था और आपात स्थिति के लिए दूसरा निकास मार्ग उपलब्ध नहीं था। इमारत के मालिक ने अवैध मंजिल का निर्माण तो कराया, लेकिन नियमानुसार बाहरी लोहे की सीढ़ियां नहीं बनवाईं। उनकी जगह लिफ्ट लगाई गई, जो आग लगने के दौरान बेकार साबित हुई। इसके अलावा मुख्य सीढ़ियों के रास्ते में बड़ी संख्या में एयर कंडीशनर की आउटर यूनिट लगी थीं। आग फैलने के साथ इन यूनिटों ने रास्ता अवरुद्ध कर दिया और धुआं तेजी से पूरे भवन में भर गया। इससे अंदर फंसे लोगों को बाहर निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं मिल सका। एसआईटी का मानना है कि यदि भवन में अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता और वैकल्पिक निकास की व्यवस्था होती, तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
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दानिश अतीक पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 9 सालों से हैं. इस समय वह इनसाइड न्यूज़ 24x7 में बतौर न्यूज़ डिर्टेक्टर और रिपोर्टर का काम कर रहे हैं. इससे पहले दानिश अतीक फोटोप्लेयर न्यूज़ में न्यूज डेस्क पर काम कर चुके हैं. उन्हें राजनीति, क्राइम और खेल पर लिखना बेहद पसंद है. दानिश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं, इन्होंने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई लखनऊ यूनिवर्सिटी से की है.
