
लखनऊ : राजधानी के राजाजीपुरम इलाके (कुंवर जे. पी. प्रसाद वार्ड, नगर निगम) से एक बेहद चौंकाने वाला और चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसने शहर की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां जलकल विभाग और लखनऊ नगर निगम की एक बड़ी पानी की टंकी बिना ढक्कन के पाई गई, जिससे लगभग 5 हजार घरों में सप्लाई होने वाला पानी सीधे तौर पर दूषित होने के खतरे में है। यह स्थिति न केवल लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि हजारों लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ भी है।

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब इलाके के स्थानीय लोगों ने इसकी शिकायत की। ड्रोन कैमरे में कैद हुई तस्वीरों ने साफ दिखाया कि पानी की टंकी पूरी तरह खुली हुई है। खुले टैंक में पक्षियों का बैठना, उनका मल-मूत्र गिरना और पानी के भीतर कीड़े-मकोड़े दिखाई देना, यह सब एक बड़े स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा करता है। यह साफ तौर पर बताता है कि निगरानी और रखरखाव की व्यवस्था कितनी कमजोर है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है। क्या संबंधित विभागों को इस स्थिति की जानकारी नहीं थी, या फिर जानबूझकर इसे नजरअंदाज किया गया? क्या उच्च अधिकारियों तक यह मामला कभी पहुंचा ही नहीं, या पहुंचने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई? इन सवालों के जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं हैं, लेकिन जनता के मन में आक्रोश जरूर है।
इस मामले ने नगर निगम और जलकल विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां शहर को “इंदौर मॉडल” पर नंबर-1 बनाने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर लोगों को दूषित पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि आम जनता के स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।

स्थानीय पार्षद गौरी साँवरिया ने इस मुद्दे को कई बार उठाया है। उन्होंने नगर निगम को बार-बार अवगत कराया और सदन में भी इस गंभीर समस्या को रखा। पार्षद का कहना है कि जनता ने उन्हें चुना है और जब लोग सवाल करते हैं तो उनके पास जवाब देना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि महापौर द्वारा एक सप्ताह के भीतर इस समस्या के समाधान का आश्वासन दिया गया था, लेकिन फिलहाल स्थिति जस की तस बनी हुई है।
हैरानी की बात यह है कि इस टंकी में पक्षी खुलेआम बैठते हैं और वहीं मल-मूत्र करते हैं, जो सीधे पानी में मिल जाता है। इसके अलावा, पानी में विभिन्न प्रकार के कीड़े भी देखे गए हैं, जो इस बात का संकेत हैं कि पानी पूरी तरह असुरक्षित है। ऐसे में करीब 50,000 लोग (नगर निगम की वार्ड सूची के अनुसार निकला गया आंकड़ा) उसी पानी का उपयोग पीने और घरेलू कामों के लिए कर रहे हैं, जो बीमारियों की जड़ बन सकता है।
सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन
- ज़िम्मेदारों को इसकी जानकारी नहीं थी?
- ज़िम्मेदारों की निगरानी में ऐसी व्यवस्था चल रही है?
- ज़िम्मेदारों तक यह मामला नहीं पहुंचा?
अब सवाल सिर्फ कार्रवाई का नहीं, बल्कि जवाबदेही का है।
- क्या इस मामले में दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी?
- क्या जल कल विभाग और नगर निगम जैसी संस्थान भी इस गंभीर मुद्दे का संज्ञान लेंगे?
जलकल विभाग का दावा है कि इस टंकी का उपयोग बहुत कम होता है और आपूर्ति जांच के बाद ही की जाती है
टंकी पुरानी है उसकी मरम्मत अवस्थापना निधि के बजट से कराई जाएगी। इसका प्रस्ताव भी पास हो गया है। इस टंकी का उपयोग पूरा नहीं किया जाता है। कुछ हिस्से में ही आपूर्ति की जाती है। पानी की आपूर्ति जांच के बाद ही की जाती है – कुलदीप सिंह, महाप्रबंधक जलकल
अब सवाल केवल कार्रवाई का नहीं, बल्कि जवाबदेही का है। क्या इस मामले में दोषियों पर सख्त कदम उठाए जाएंगे? क्या संबंधित संस्थान इस गंभीर मुद्दे का संज्ञान लेकर ठोस कार्रवाई करेंगे? फिलहाल, हजारों लोग एक ऐसी व्यवस्था पर निर्भर हैं, जो खुद उनके स्वास्थ्य के लिए खतरा बन चुकी है। अब देखना यह है कि प्रशासन जागता है या फिर “नंबर-1 शहर” के दावों के पीछे सच्चाई यूं ही छिपी रहती है।
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दानिश अतीक पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 9 सालों से हैं. इस समय वह इनसाइड न्यूज़ 24x7 में बतौर न्यूज़ डिर्टेक्टर और रिपोर्टर का काम कर रहे हैं. इससे पहले दानिश अतीक फोटोप्लेयर न्यूज़ में न्यूज डेस्क पर काम कर चुके हैं. उन्हें राजनीति, क्राइम और खेल पर लिखना बेहद पसंद है. दानिश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं, इन्होंने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई लखनऊ यूनिवर्सिटी से की है.

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