
गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने की मांग और योगी आदित्यनाथ की प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में मुस्लिम धर्मगुरुओं द्वारा गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किए जाने की मांग पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे दोहरे मापदंड का उदाहरण बताया। बिजनौर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि गाय भारतीय संस्कृति में केवल एक पशु नहीं बल्कि “गो माता” है, इसलिए उसे राष्ट्रमाता या राष्ट्रीय पशु घोषित करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि मां और पुत्र के रिश्ते को किसी सरकारी घोषणा की जरूरत नहीं होती। योगी ने यह भी कहा कि जो लोग गाय को केवल एक जानवर के रूप में देखते हैं, वे उसकी धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को नहीं समझते। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ लोग एक तरफ गोहत्या का समर्थन करते हैं और दूसरी तरफ गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने की मांग करते हैं, जो उनके अनुसार विरोधाभासी रवैया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश सरकार गोहत्या के खिलाफ अपनी सख्त नीति जारी रखेगी और कानून का उल्लंघन करने वालों पर कठोर कार्रवाई होगी।
मुस्लिम धर्मगुरुओं का पक्ष और राष्ट्रीय पशु की मांग

गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग केवल हिंदू संगठनों तक सीमित नहीं रही है, बल्कि कई प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी इसका समर्थन किया है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि यदि गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा मिल जाता है तो उसके नाम पर होने वाली हिंसा, मॉब लिंचिंग और राजनीतिक विवादों को रोका जा सकता है। मदनी का तर्क है कि एक स्पष्ट राष्ट्रीय नीति बनने से धार्मिक और राजनीतिक टकराव कम होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि देश में पशु वध संबंधी कानून अलग-अलग राज्यों में अलग हैं, जिससे भ्रम और विवाद की स्थिति पैदा होती है। इसी तरह ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। उनका मानना है कि इस मुद्दे पर सर्वसम्मति बनाकर सामाजिक सद्भाव को मजबूत किया जा सकता है। इन धर्मगुरुओं का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी धार्मिक बहस को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि समाज में शांति और सौहार्द स्थापित करना है।
हामिद अंसारी और अन्य नेताओं का समर्थन
पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने भी गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने के विचार का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि यदि इस कदम से गोहत्या को लेकर बार-बार होने वाले विवादों और सामाजिक तनाव को कम किया जा सकता है, तो इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। अंसारी ने मुसलमानों से बकरीद के अवसर पर गाय की कुर्बानी न देने की अपील भी की और कहा कि इस्लाम किसी विशेष जानवर की कुर्बानी को अनिवार्य नहीं मानता। उनके अनुसार, सामाजिक सद्भाव और पारस्परिक सम्मान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। अंसारी ने यह भी कहा कि यदि किसी संवेदनशील मुद्दे का स्थायी समाधान राष्ट्रीय स्तर पर किसी निर्णय के माध्यम से निकल सकता है, तो उसे सकारात्मक दृष्टि से देखा जाना चाहिए। इस प्रकार मुस्लिम समाज के कई प्रमुख चेहरे और धार्मिक नेता इस मांग को सांप्रदायिक नहीं बल्कि सामाजिक समाधान के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।
आकार पटेल की आलोचना और संवैधानिक बहस
एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के पूर्व अध्यक्ष और लेखक आकार पटेल ने इस पूरे विवाद पर टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के रुख को “पाखंड” करार दिया है। अपने लेख में उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 48 राज्यों को गाय और अन्य दुधारू पशुओं की हत्या पर रोक लगाने के लिए प्रोत्साहित करता है, लेकिन यह एक नीति-निर्देशक सिद्धांत है, बाध्यकारी कानून नहीं। पटेल का तर्क है कि संविधान में यह प्रावधान धार्मिक कारणों से नहीं बल्कि आर्थिक और कृषि संबंधी हितों को ध्यान में रखकर शामिल किया गया था। उन्होंने संविधान सभा की बहसों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय मुस्लिम प्रतिनिधियों ने भी स्पष्ट और समान कानून की वकालत की थी। पटेल के अनुसार, अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग कानून होने से राजनीतिक ध्रुवीकरण और हिंसा को बढ़ावा मिलता है। उनका मानना है कि केंद्र सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि भारत का दृष्टिकोण धर्मनिरपेक्ष मूल्यों पर आधारित होगा या धार्मिक भावनाओं पर। उन्होंने निष्कर्ष में कहा कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने से समस्याएं पूरी तरह खत्म हों या न हों, लेकिन इससे इस मुद्दे पर मौजूद राजनीतिक और वैचारिक विरोधाभास जरूर उजागर हो जाएंगे।
About the Reporter
दानिश अतीक पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 9 सालों से हैं. इस समय वह इनसाइड न्यूज़ 24x7 में बतौर न्यूज़ डिर्टेक्टर और रिपोर्टर का काम कर रहे हैं. इससे पहले दानिश अतीक फोटोप्लेयर न्यूज़ में न्यूज डेस्क पर काम कर चुके हैं. उन्हें राजनीति, क्राइम और खेल पर लिखना बेहद पसंद है. दानिश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं, इन्होंने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई लखनऊ यूनिवर्सिटी से की है.
