लखनऊ में बिजली कटौती से हाहाकार: रात होते ही अंधेरे में डूब रही राजधानी, जनता बेहाल

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ इन दिनों भीषण बिजली संकट से जूझ रही है। सरकार जहां बेहतर बिजली व्यवस्था और निर्बाध सप्लाई के दावे करती नहीं थकती, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। हालात ऐसे हैं कि रात होते ही शहर के कई इलाकों में अंधेरा छा जाता है और लोग घंटों बिजली आने का इंतजार करते रह जाते हैं। गर्मी और उमस के बीच बिजली कटौती ने राजधानीवासियों का जीना मुश्किल कर दिया है।
सबसे बड़ी बात यह है कि यह संकट किसी दूरदराज इलाके का नहीं, बल्कि प्रदेश की राजधानी और वीवीआईपी शहर लखनऊ का है। मुख्यमंत्री आवास से महज एक किलोमीटर की दूरी पर भी बिजली व्यवस्था चरमराई हुई है। जयप्रकाश नगर, हजरतगंज, गौतम पल्ली, पार्क रोड, प्राग नारायण रोड, बालू अड्डा, डालीबाग और आसपास के क्षेत्रों में लगातार बिजली गुल रहने की शिकायतें सामने आ रही हैं। लोग रात भर पसीने में तरबतर होकर जागने को मजबूर हैं।
दिनभर दफ्तरों में काम करके लौटने वाले कर्मचारियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। घर पहुंचते ही राहत मिलने के बजाय अंधेरा और गर्मी उनका स्वागत कर रही है। कई परिवारों में छोटे बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग बिजली कटौती से सबसे ज्यादा परेशान हैं। इनवर्टर जवाब दे चुके हैं, पानी की सप्लाई प्रभावित हो रही है और मोबाइल चार्जिंग तक की समस्या खड़ी हो गई है।

ऊर्जा मंत्री एके शर्मा पर भी अब सवाल उठने लगे हैं। जनता पूछ रही है कि जब राजधानी की यह हालत है तो बाकी जिलों का क्या हाल होगा। विभागीय दावों और धरातल की तस्वीर में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। अधिकारी लगातार मीटिंग और समीक्षा की बात करते हैं, लेकिन सप्लाई व्यवस्था सुधरती नजर नहीं आ रही। बिजली विभाग के जेई से लेकर एसडीओ तक व्यवस्था संभालने में फेल साबित हो रहे हैं।
जवाहर भवन और डालीबाग पावर हाउस जैसे अहम केंद्र भी सुचारु सप्लाई देने में नाकाम नजर आ रहे हैं। UPPCL के आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं और जिम्मेदार अधिकारी बेपरवाह दिखाई दे रहे हैं। लोगों का आरोप है कि शिकायत करने पर न तो फोन उठते हैं और न ही समय पर समाधान मिलता है। कई बार फॉल्ट के नाम पर घंटों कटौती की जाती है, लेकिन मरम्मत कार्य का कोई ठोस असर नजर नहीं आता।
दूसरी ओर प्रीपेड मीटर योजना ने उपभोक्ताओं की परेशानियां और बढ़ा दी हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले ही बिजली कटौती झेलनी पड़ रही है, ऊपर से प्रीपेड मीटर के कारण आर्थिक दबाव भी बढ़ गया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब सप्लाई नियमित नहीं है तो एडवांस भुगतान किस बात का लिया जा रहा है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसदीय क्षेत्र में इस तरह की बिजली बदहाली ने सरकार की छवि पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। राजधानी में अंधेरा और जनता परेशान—यह तस्वीर प्रशासनिक दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। अब जरूरत है सिर्फ बैठकों और दावों की नहीं, बल्कि सख्त कार्रवाई और जमीनी सुधार की। वरना लखनऊ की जनता का गुस्सा आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है।
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दानिश अतीक पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 9 सालों से हैं. इस समय वह इनसाइड न्यूज़ 24x7 में बतौर न्यूज़ डिर्टेक्टर और रिपोर्टर का काम कर रहे हैं. इससे पहले दानिश अतीक फोटोप्लेयर न्यूज़ में न्यूज डेस्क पर काम कर चुके हैं. उन्हें राजनीति, क्राइम और खेल पर लिखना बेहद पसंद है. दानिश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं, इन्होंने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई लखनऊ यूनिवर्सिटी से की है.
