मेरठ में अवैध निर्माणों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच अब शहर का प्रसिद्ध इस्कॉन मंदिर भी आवास विकास परिषद की कार्रवाई की जद में आ गया है। जानकारी के अनुसार सेंट्रल मार्केट क्षेत्र में स्थित जिस भवन में चार वर्ष पहले इस्कॉन मंदिर की स्थापना की गई थी, उसे लेकर अब नोटिस जारी किया गया है। यह मामला सामने आने के बाद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल है, क्योंकि मंदिर में प्रतिदिन हजारों की संख्या में कृष्ण भक्त दर्शन करने पहुंचते हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है।
बताया जा रहा है कि जिस स्थान पर वर्तमान में इस्कॉन मंदिर संचालित हो रहा है, वह पहले एक वीरान और खाली पड़ी कोठी थी। चार साल पहले इस भवन को धार्मिक स्वरूप देते हुए यहां इस्कॉन मंदिर की स्थापना की गई थी। धीरे-धीरे यह स्थान श्रद्धा और आस्था का केंद्र बन गया। मंदिर परिसर में नियमित रूप से आरती, भजन-कीर्तन, सत्संग और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होने लगे। इसके बाद यहां भक्तों की संख्या लगातार बढ़ती गई और आज यह मेरठ के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाने लगा है।

हालांकि अब आवास विकास परिषद ने इस भवन को लेकर नोटिस जारी किया है। अधिकारियों का कहना है कि भवन निर्माण में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया है और सेटबैक क्षेत्र में निर्माण किया गया है। सेटबैक वह निर्धारित खुला क्षेत्र होता है जिसे भवन के चारों ओर खाली छोड़ा जाना अनिवार्य होता है, ताकि सुरक्षा, यातायात और सार्वजनिक सुविधा संबंधी मानकों का पालन किया जा सके। परिषद का दावा है कि इसी नियम के उल्लंघन के चलते मंदिर भवन को नोटिस दिया गया है।
सूत्रों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत मेरठ में अवैध निर्माणों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में सेंट्रल मार्केट समेत कई क्षेत्रों में निर्माणों को चिह्नित किया गया है।
प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई किसी संस्था, व्यक्ति या धार्मिक स्थल को लक्ष्य बनाकर नहीं, बल्कि नियमों के अनुसार की जा रही है। यदि कोई निर्माण मानकों के विपरीत पाया जाता है, तो उस पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी ओर मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह स्थान केवल एक भवन नहीं, बल्कि हजारों लोगों की आस्था का केंद्र है। उनका कहना है कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना के लिए आते हैं और अनेक सामाजिक व धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं। ऐसे में मंदिर पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं। कई भक्तों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में संवेदनशीलता बरती जाए और कोई ऐसा समाधान निकाला जाए जिससे नियमों का पालन भी हो और धार्मिक गतिविधियां भी प्रभावित न हों।
फिलहाल इस पूरे मामले ने मेरठ में नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक ओर प्रशासन अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्ती दिखा रहा है, वहीं दूसरी ओर श्रद्धालु मंदिर को बचाने की मांग कर रहे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन आगे क्या फैसला लेता है और इस्कॉन मंदिर को राहत मिलती है या नहीं।
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दानिश अतीक पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 9 सालों से हैं. इस समय वह इनसाइड न्यूज़ 24x7 में बतौर न्यूज़ डिर्टेक्टर और रिपोर्टर का काम कर रहे हैं. इससे पहले दानिश अतीक फोटोप्लेयर न्यूज़ में न्यूज डेस्क पर काम कर चुके हैं. उन्हें राजनीति, क्राइम और खेल पर लिखना बेहद पसंद है. दानिश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं, इन्होंने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई लखनऊ यूनिवर्सिटी से की है.
