लखनऊ में LSA कंपनी पर गंभीर सवाल: जोन-3 के जोनल इंचार्ज का विवादित वीडियो वायरल, संविधान पर आपत्तिजनक टिप्पणी से मचा बवाल
लखनऊ में नगर निगम की स्वच्छता व्यवस्था संभाल रही निजी कंपनी लखनऊ स्वच्छता अभियान प्राइवेट लिमिटेड (LSA) एक बार फिर विवादों में घिर गई है। इस बार मामला बेहद गंभीर है, क्योंकि कंपनी के जोन-3 के जोनल इंचार्ज प्रशांत मिश्रा का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह संविधान, कानून और न्याय व्यवस्था को लेकर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी करते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद शहर में राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
वायरल वीडियो में संबंधित अधिकारी कथित तौर पर कहते सुनाई दे रहे हैं कि “संविधान कुछ नहीं है, जिसके हाथ में पावर है वही सर्वोपरि है… कानून गया तेल लेने, पैसा ही पावर है।”
इस बयान को लेकर लोगों में भारी आक्रोश है। नागरिकों का कहना है कि यह सिर्फ संविधान का अपमान नहीं, बल्कि लोकतंत्र और कानून व्यवस्था को खुली चुनौती है। जिस देश में संविधान सर्वोच्च है, वहां किसी जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस तरह की भाषा का इस्तेमाल बेहद चिंताजनक माना जा रहा है।

स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स ने इस वीडियो के वायरल होते ही शासन-प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग शुरू कर दी है। लोगों का कहना है कि यदि ऐसे लोगों को जिम्मेदार पदों पर बैठाया जाएगा तो आम जनता के अधिकारों और सम्मान की रक्षा कैसे होगी। कई यूजर्स ने यह भी कहा कि ऐसे बयान देने वालों पर तुरंत मुकदमा दर्ज होना चाहिए और उन्हें पद से हटाया जाना चाहिए।
इस घटना के बाद LSA कंपनी की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर कंपनी में किस तरह के लोगों की नियुक्ति की जा रही है, जो खुलेआम कानून और संविधान को चुनौती देते नजर आ रहे हैं। यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या कंपनी प्रशासन ऐसे बयानों से सहमत है या फिर इस पर चुप्पी साधकर बचाव कर रहा है।
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब कंपनी के पुराने रिकॉर्ड भी चर्चा में आने लगे। आरोप है कि ईको ग्रीन के पूर्व जोनल इंचार्ज विनय सिंह, जिन पर सरकारी एक करोड़ रुपये के गबन का आरोप था, उन्हें पूर्व नगर आयुक्त IAS अजय कुमार द्विवेदी ने पद से हटाया था। लेकिन बाद में LSA कंपनी ने उन्हें दोबारा उसी जोन में यूनिट इंचार्ज के पद पर नियुक्त कर दिया। इससे कंपनी की नीयत और भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शहर में चर्चा है कि कंपनी में ऐसे लोगों को तवज्जो दी जा रही है जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप रहे हैं या जो कानून व्यवस्था को महत्व नहीं देते। ऐसे में रिजनल हेड अभय रंजन और प्रोजेक्ट हेड भास्कर राव मुसला की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि क्या इन अधिकारियों की जानकारी में यह सब हो रहा है, या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि शासन और नगर निगम प्रशासन इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाता है। क्या सिर्फ जांच के नाम पर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा, या फिर दोषियों पर ठोस कार्रवाई होगी? लखनऊ की जनता फिलहाल यही इंतजार कर रही है कि संविधान और कानून का अपमान करने वालों को क्या वास्तव में सजा मिलेगी, या फिर सत्ता और पैसे के दम पर सब कुछ दबा दिया जाएगा।
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दानिश अतीक पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 9 सालों से हैं. इस समय वह इनसाइड न्यूज़ 24x7 में बतौर न्यूज़ डिर्टेक्टर और रिपोर्टर का काम कर रहे हैं. इससे पहले दानिश अतीक फोटोप्लेयर न्यूज़ में न्यूज डेस्क पर काम कर चुके हैं. उन्हें राजनीति, क्राइम और खेल पर लिखना बेहद पसंद है. दानिश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं, इन्होंने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई लखनऊ यूनिवर्सिटी से की है.
