उत्तर प्रदेश में बढ़ती ऊर्जा लागत और गैस की कमी को लेकर उद्योग जगत में चिंता गहराने लगी है। प्रदेश सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। श्रम एवं सेवायोजन विभाग की उच्च स्तरीय बैठक में ऊर्जा बचत, रोजगार सुरक्षा और औद्योगिक गतिविधियों को सुचारु बनाए रखने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में यह तय किया गया कि बड़े व्यावसायिक संस्थानों और उद्योगों में सप्ताह में कम से कम दो दिन “वर्क फ्रॉम होम” व्यवस्था लागू करने के लिए एडवाइजरी जारी की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे ऊर्जा की खपत कम होगी और कर्मचारियों को भी राहत मिलेगी।

श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन संस्थानों में बड़ी संख्या में कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां ऑनलाइन कार्य प्रणाली को प्राथमिकता दी जाए। इसके साथ ही कार्यालयों और फैक्ट्रियों में अलग-अलग शिफ्ट लागू करने का भी निर्णय लिया गया है, ताकि एक समय पर ऊर्जा की मांग कम हो सके। मंत्री ने कहा कि विभागीय अधिकारी औद्योगिक इकाइयों, स्टार्टअप्स और निजी संस्थानों के साथ बैठक कर उन्हें भी वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था अपनाने के लिए प्रेरित करें।
बैठक में यह चिंता भी जताई गई कि पश्चिम एशिया में होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास उत्पन्न संकट के कारण व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। इसका असर खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीय श्रमिकों पर पड़ सकता है। सरकार को आशंका है कि विदेशों में कार्यरत कई लोग बेरोजगार होकर वापस लौट सकते हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए श्रम विभाग ने हेल्प डेस्क स्थापित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि प्रभावित श्रमिकों को समय रहते सहायता और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा सके।
ऊर्जा और गैस आधारित उद्योगों में उत्पादन लागत तेजी से बढ़ रही है। इससे कई उद्योगों में छंटनी और रोजगार समाप्त होने का खतरा मंडरा रहा है। सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि संभावित संकट से निपटने के लिए तत्काल तैयारी की जाए। ई-श्रम पोर्टल के डेटा का उपयोग कर प्रभावित श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि वे अफवाहों पर नजर रखें और गलत सूचनाओं का तुरंत खंडन करें, ताकि श्रमिकों और उद्योगों में अनावश्यक भय का माहौल न बने।
बैठक में श्रमिकों के स्वास्थ्य और पोषण पर भी चर्चा हुई। ऊर्जा और संसाधनों की बचत के साथ-साथ कम तेल वाले भोजन को बढ़ावा देने की सलाह दी गई। श्रम विभाग को निर्माण श्रमिकों से जुड़े हितलाभ आवेदनों की नियमित समीक्षा करने और निर्माणाधीन विभागीय कार्यालयों के कार्य में तेजी लाने के निर्देश भी दिए गए। अधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो बढ़ती लागत और ऊर्जा संकट का असर प्रदेश के रोजगार और औद्योगिक विकास पर पड़ सकता है।
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दानिश अतीक पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 9 सालों से हैं. इस समय वह इनसाइड न्यूज़ 24x7 में बतौर न्यूज़ डिर्टेक्टर और रिपोर्टर का काम कर रहे हैं. इससे पहले दानिश अतीक फोटोप्लेयर न्यूज़ में न्यूज डेस्क पर काम कर चुके हैं. उन्हें राजनीति, क्राइम और खेल पर लिखना बेहद पसंद है. दानिश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं, इन्होंने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई लखनऊ यूनिवर्सिटी से की है.

