
लखनऊ में पार्षद ललित तिवारी को शपथ न दिलाने के मामले में शुक्रवार को अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मामले का निस्तारण कर दिया। इस प्रकरण में मेयर की ओर से कोर्ट में एफिडेविट दाखिल किया गया, जिसमें शपथ ग्रहण न कराने को लेकर माफी मांगी गई। अदालत ने माफी स्वीकार करते हुए केस को समाप्त कर दिया।
दरअसल, पार्षद ललित तिवारी को शपथ दिलाने में देरी को लेकर मामला कोर्ट पहुंचा था। इस मुद्दे ने नगर निगम की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े किए थे। विपक्षी दलों और समर्थकों ने भी इस विषय को लेकर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी थीं। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नगर निगम प्रशासन से जवाब मांगा था।
आज हुई सुनवाई में मेयर की तरफ से शपथ ग्रहण से जुड़े पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत एफिडेविट दाखिल किया गया। एफिडेविट में अदालत से खेद व्यक्त करते हुए भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न होने का आश्वासन दिया गया। मेयर पक्ष ने कहा कि किसी प्रकार की दुर्भावना नहीं थी और प्रक्रिया संबंधी कारणों से यह स्थिति बनी थी।
कोर्ट ने मेयर की ओर से पेश किए गए एफिडेविट और माफी को स्वीकार करते हुए मामले का निस्तारण कर दिया। अदालत ने कहा कि चूंकि संबंधित पक्ष ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है और भविष्य में सुधार का आश्वासन दिया है, इसलिए मामले को आगे बढ़ाने की आवश्यकता नहीं है।
इस फैसले के बाद नगर निगम की राजनीति में चल रही चर्चा पर फिलहाल विराम लग गया है। वहीं, पार्षद ललित तिवारी के समर्थकों ने अदालत के फैसले को न्याय की जीत बताया है।
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दानिश अतीक पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 9 सालों से हैं. इस समय वह इनसाइड न्यूज़ 24x7 में बतौर न्यूज़ डिर्टेक्टर और रिपोर्टर का काम कर रहे हैं. इससे पहले दानिश अतीक फोटोप्लेयर न्यूज़ में न्यूज डेस्क पर काम कर चुके हैं. उन्हें राजनीति, क्राइम और खेल पर लिखना बेहद पसंद है. दानिश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं, इन्होंने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई लखनऊ यूनिवर्सिटी से की है.
