दरोगा की ड्राइविंग क्लास बनी मौत का खेल! लखनऊ में दरोगा की पत्नी चला रही थी कार, टक्कर से युवक की मौत, ग्रामीणों ने पकड़ा तो लगी रोने, पूरा शहर जानता है कातिल कौन, पुलिस रिकॉर्ड में अब भी “अज्ञात”


लखनऊ के दुबग्गा थाना क्षेत्र में हुआ यह दर्दनाक हादसा अब सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह उस सिस्टम की सड़ी हुई सच्चाई बन चुका है, जहां कानून की किताब गरीबों के लिए अलग और वर्दी वालों के लिए अलग लिखी जाती है। एक तरफ 23 साल के मोहम्मद साहिल की लाश सड़क पर पड़ी थी, दूसरी तरफ खाकी अपनी इज्जत बचाने के लिए कागजों में सच का गला घोंटने में जुटी थी। सवाल सिर्फ एक युवक की मौत का नहीं है, सवाल यह है कि क्या पुलिस अब अपराध छिपाने वाली संस्था बन चुकी है?

आरोप बेहद गंभीर हैं। बताया जा रहा है कि काकोरी थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर आकाश कुशवाहा अपनी पत्नी को Creta कार नंबर UP 12 CE 6277 से ड्राइविंग सिखा रहे थे। हरदोई रोड स्थित अंधे की चौकी के पास तेज रफ्तार कार ने बाइक सवार दो युवकों को ऐसी टक्कर मारी कि मोहम्मद साहिल की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके साथी मो. महताब अली जिंदगी और मौत के बीच अस्पताल में संघर्ष कर रहे हैं। जिस घर का साहिल इकलौता कमाने वाला बेटा था, आज उसी घर में मातम पसरा है। चार बहनों का भाई चला गया, कैंसर से जूझ रहे पिता का सहारा छिन गया, लेकिन सिस्टम को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

सब-इंस्पेक्टर आकाश कुशवाहा और उसकी पत्नी जो गाड़ी चला रही थी
सब-इंस्पेक्टर आकाश कुशवाहा और उसकी पत्नी जो गाड़ी चला रही थी

हादसे के बाद जो हुआ, उसने इंसानियत और कानून दोनों को शर्मसार कर दिया। आरोप है कि दुर्घटना को छिपाने के लिए कार को जानबूझकर पेड़ से भिड़ा दिया गया, ताकि कहानी बनाई जा सके कि बाइक खुद पेड़ से टकराई थी। यह कोई आम आदमी नहीं कर सकता, यह वही कर सकता है जिसे पता हो कि सिस्टम उसकी जेब में है। लेकिन शायद दरोगा जी यह भूल गए कि सड़क पर मौजूद लोग सब देख रहे थे। स्थानीय लोगों ने मौके पर ही महिला चालक और दरोगा को पकड़ लिया। वीडियो बनाए गए, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हैं। जनता ने सोचा कि अब सच सामने आएगा, लेकिन पुलिस ने फिर साबित कर दिया कि वर्दी बचाने के लिए सच की हत्या करना उन्हें बखूबी आता है।

सबसे बड़ा खेल एफआईआर में हुआ। प्रत्यक्षदर्शी बता रहे हैं कि गाड़ी कौन चला रहा था। शिकायत पत्र में साफ लिखा गया कि महिला चालक वाहन चला रही थी। कार का नंबर तक दर्ज है। फिर भी दुबग्गा पुलिस की कलम अचानक कमजोर पड़ गई। एफआईआर में चालक का नाम “अज्ञात” लिख दिया गया। रिश्तेदार “अज्ञात”, पता “अज्ञात”। आखिर कैसे? पूरे शहर को पता है कि गाड़ी किसकी है, कौन चला रहा था, लेकिन पुलिस को कुछ नहीं पता! क्या यह जांच है या फिर अपराधियों को बचाने का सरकारी दस्तावेज?

पीड़ित परिवार का आरोप है कि थाने में आरोपी पक्ष को वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। एसी कमरों में बैठाकर खातिरदारी हो रही है, जबकि इंसाफ मांगने वालों को थाने से धक्का देकर बाहर किया जा रहा है। यही है आम आदमी की औकात इस सिस्टम में। गरीब का बेटा मर जाए तो उसकी कीमत कुछ लाख रुपये और समझौते का दबाव। लेकिन अगर आरोपी वर्दी वाला हो, तो पूरा सिस्टम उसके बचाव में ढाल बन जाता है।

आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस देश में कानून सिर्फ कमजोरों के लिए है? क्या वर्दी पहन लेने के बाद इंसान कानून से ऊपर हो जाता है? अगर आरोपी कोई गरीब होता, तो अब तक उसका नाम, फोटो और पूरा खानदान मीडिया में घसीटा जा चुका होता। लेकिन यहां मामला खाकी से जुड़ा है, इसलिए सच को “अज्ञात” बनाकर दफनाने की कोशिश हो रही है। दुबग्गा की जनता सब देख रही है और समझ रही है कि आखिर इंसाफ की इमारत झूठ की नींव पर कैसे खड़ी की जा रही है।

About the Reporter

Journalist at Inside News 24x7 | Website | + posts

दानिश अतीक पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 9 सालों से हैं. इस समय वह इनसाइड न्यूज़ 24x7 में बतौर न्यूज़ डिर्टेक्टर और रिपोर्टर का काम कर रहे हैं. इससे पहले दानिश अतीक फोटोप्लेयर न्यूज़ में न्यूज डेस्क पर काम कर चुके हैं. उन्हें राजनीति, क्राइम और खेल पर लिखना बेहद पसंद है. दानिश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं, इन्होंने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई लखनऊ यूनिवर्सिटी से की है.


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *