आखिरकार यूपी को चार साल के लंबे अंतराल के बाद स्थायी डीजीपी मिल गया है। वर्तमान में कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण को पूर्णकालिक डीजीपी बनाए जाने के प्रस्ताव पर मंजूरी दे दी गई है। इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है।

उत्तर प्रदेश को करीब चार वर्षों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार अपना पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मिल गया है। वर्तमान में कार्यवाहक डीजीपी के रूप में कार्यरत रहे राजीव कृष्ण को राज्य का स्थायी डीजीपी नियुक्त किया गया है। शासन स्तर पर सभी औपचारिकताओं के पूरा होने और संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा भेजे गए पैनल पर विचार-विमर्श के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके नाम पर अंतिम मुहर लगा दी। इस संबंध में आधिकारिक आदेश भी जारी कर दिया गया है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश को वर्ष 2022 के बाद पहली बार स्थायी डीजीपी मिला है।

यूपीएससी ने 26 मई को आयोजित बैठक के बाद प्रदेश सरकार को तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का पैनल भेजा था। इस पैनल में 1990 बैच की आईपीएस अधिकारी रेणुका मिश्रा तथा 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी पीयूष आनंद और राजीव कृष्ण के नाम शामिल थे। शुरुआत से ही राजीव कृष्ण का नाम सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था। शासन और पुलिस महकमे में उनके अनुभव तथा प्रशासनिक क्षमता को देखते हुए अंततः मुख्यमंत्री ने उन्हें प्रदेश की पुलिस का सर्वोच्च पद सौंपने का निर्णय लिया।
राजीव कृष्ण एक जून 2025 से कार्यवाहक डीजीपी के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे थे। 1991 बैच के इस वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को पुलिस विभाग में उनके लंबे प्रशासनिक और मैदानी अनुभव के लिए जाना जाता है। उन्होंने अपने तीन दशक से अधिक लंबे करियर में उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण जिलों और जोनों में जिम्मेदारियां संभाली हैं। उनकी कार्यशैली को प्रभावी, अनुशासित और परिणामोन्मुख माना जाता है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और यूपीएससी की व्यवस्था के अनुसार किसी भी राज्य के स्थायी डीजीपी का कार्यकाल न्यूनतम दो वर्ष का होता है। ऐसे में राजीव कृष्ण के इस पद पर नियुक्त होने के बाद उनके वर्ष 2028 तक डीजीपी बने रहने की संभावना है। वर्ष 2022 में तत्कालीन डीजीपी मुकुल गोयल को पद से हटाए जाने के बाद से उत्तर प्रदेश में स्थायी डीजीपी की नियुक्ति नहीं हो सकी थी। तब से पुलिस विभाग कार्यवाहक व्यवस्था के तहत संचालित हो रहा था।
राजीव कृष्ण की गिनती प्रदेश शासन के भरोसेमंद और सक्षम अधिकारियों में होती है। कार्यवाहक डीजीपी बनने से पहले वे डीजी इंटेलिजेंस और पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के अध्यक्ष जैसे दो महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी एक साथ संभाल रहे थे। खुफिया तंत्र और पुलिस भर्ती व्यवस्था में उनके योगदान को भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।
मैदानी स्तर पर भी उनका अनुभव बेहद व्यापक रहा है। वे लखनऊ, मथुरा, इटावा, आगरा और नोएडा जैसे महत्वपूर्ण जिलों के पुलिस कप्तान रह चुके हैं। इटावा में तैनाती के दौरान उन्होंने दस्यु गिरोहों के खिलाफ प्रभावी अभियान चलाकर बड़ी सफलता हासिल की थी। उनकी नेतृत्व क्षमता और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की दक्षता के कारण उन्हें पुलिस महकमे के सबसे अनुभवी अधिकारियों में शामिल किया जाता है।
राजीव कृष्ण की नियुक्ति को उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय माना जा रहा है। इससे पुलिस विभाग को स्थायी नेतृत्व मिलेगा और कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण तथा पुलिस सुधारों की दिशा में निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
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दानिश अतीक पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 9 सालों से हैं. इस समय वह इनसाइड न्यूज़ 24x7 में बतौर न्यूज़ डिर्टेक्टर और रिपोर्टर का काम कर रहे हैं. इससे पहले दानिश अतीक फोटोप्लेयर न्यूज़ में न्यूज डेस्क पर काम कर चुके हैं. उन्हें राजनीति, क्राइम और खेल पर लिखना बेहद पसंद है. दानिश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं, इन्होंने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई लखनऊ यूनिवर्सिटी से की है.

