राम मंदिर का फर्जी लोगो लगाकर ऑनलाइन चंदा लेने का नया मामला सामने आया है. ट्रस्ट का इससे कोई लेना-देना नहीं था लेकिन सवाल ये कि क्या ट्रस्ट को इन सबके बारे में कुछ पता था या नहीं और अगर था तो इस पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई.

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी से जुड़े मामले में अब एक और बड़ा खुलासा सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के आधिकारिक लोगो से मिलता-जुलता एक फर्जी लोगो तैयार कर उसके नाम से वेबसाइट और सोशल मीडिया पेज संचालित किए जा रहे थे। इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए श्रद्धालुओं से ऑनलाइन दान भी लिया जाता था। इस नए खुलासे ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। वहीं, मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने कई लोगों से पूछताछ की है और जल्द ही अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप सकती है।
राम मंदिर ट्रस्ट के नाम पर फर्जी वेबसाइट और लोगो का खेल

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया गया था। ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आधिकारिक वेबसाइट बनाई, जिस पर ऑनलाइन दान करने का विकल्प भी उपलब्ध कराया गया। लेकिन कुछ समय बाद ट्रस्ट के आधिकारिक लोगो से बेहद मिलता-जुलता एक फर्जी लोगो तैयार कर दूसरी वेबसाइट और फेसबुक पेज बना दिए गए। दावा किया जा रहा है कि इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए श्रद्धालुओं को दान के लिए लिंक भेजे जाते थे और उनसे ऑनलाइन चंदा एकत्र किया जाता था। चूंकि फर्जी लोगो और वेबसाइट आधिकारिक प्लेटफॉर्म जैसी ही दिखाई देती थी, इसलिए कई श्रद्धालु असली और नकली में अंतर नहीं कर पाए। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस कथित नेटवर्क के पीछे कौन लोग थे और कितनी राशि इस माध्यम से जुटाई गई।
सूत्रों का दावा- विश्व हिंदू परिषद से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सूत्रों का कहना है कि ट्रस्ट का इन गतिविधियों से कोई सीधा संबंध नहीं था, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि ट्रस्ट को इस तरह की समानांतर वेबसाइट और फर्जी लोगो की जानकारी थी तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई। यदि जानकारी नहीं थी, तो इतनी बड़ी हेराफेरी लंबे समय तक कैसे चलती रही। यही वजह है कि अब जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है और कई लोगों से पूछताछ की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
सीता रसोई फाउंडेशन की वेबसाइट बंद, सोशल मीडिया अब भी सक्रिय
इस विवाद के बीच “मां सीता रसोई अयोध्या फाउंडेशन” नाम की संस्था भी चर्चा में आ गई है। जानकारी के अनुसार, इस संस्था की वेबसाइट, जो वर्ष 2024 तक सक्रिय थी, अब बंद हो चुकी है। हालांकि इसका फेसबुक पेज अभी भी सक्रिय बताया जा रहा है। सोशल मीडिया पर मौजूद लोगो और अन्य सामग्री को देखकर जांच एजेंसियां यह पड़ताल कर रही हैं कि कहीं इसका संबंध फर्जी दान अभियान से तो नहीं था। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि इस संस्था के माध्यम से कोई आर्थिक लेन-देन हुआ था या नहीं। फिलहाल एजेंसियां डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग ट्रांजैक्शन और सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच कर रही हैं ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जा सके।
एसआईटी की जांच अंतिम चरण में, जल्द सरकार को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
राम मंदिर चढ़ावे में कथित हेराफेरी और फर्जी लोगो के जरिए ऑनलाइन चंदा जुटाने के खुलासे के बाद गठित एसआईटी लगातार जांच कर रही है। टीम ने अयोध्या में कई लोगों से पूछताछ की है और संबंधित दस्तावेजों के साथ डिजिटल साक्ष्यों को भी खंगाला है। जानकारी के अनुसार, एसआईटी अब लखनऊ लौट रही है और अपनी विस्तृत रिपोर्ट जल्द ही राज्य सरकार को सौंपेगी। रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार आगे की कानूनी कार्रवाई पर निर्णय ले सकती है। यदि जांच में फर्जी वेबसाइट, सोशल मीडिया पेज और ऑनलाइन चंदा जुटाने के आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की संभावना है। फिलहाल पूरे मामले पर सभी की नजर एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि श्रद्धालुओं के नाम पर कथित रूप से हुए इस ऑनलाइन चंदा नेटवर्क में किन-किन लोगों की भूमिका थी।
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दानिश अतीक पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 9 सालों से हैं. इस समय वह इनसाइड न्यूज़ 24x7 में बतौर न्यूज़ डिर्टेक्टर और रिपोर्टर का काम कर रहे हैं. इससे पहले दानिश अतीक फोटोप्लेयर न्यूज़ में न्यूज डेस्क पर काम कर चुके हैं. उन्हें राजनीति, क्राइम और खेल पर लिखना बेहद पसंद है. दानिश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं, इन्होंने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई लखनऊ यूनिवर्सिटी से की है.
