लखनऊ अग्निकांड: तीन मंजिला इमारत में लगी भीषण आग, 18 लोगों की मौत; छात्रों और कर्मचारियों से भरा था एनिमेशन सेंटर
राजधानी लखनऊ में दर्दनाक अग्निकांड, 18 लोगों की मौत से मचा हड़कंप

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में सोमवार दोपहर हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। उषा मेहता मार्ग स्थित एक तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत में अचानक लगी आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप धारण कर लिया। हादसे के समय इमारत में संचालित एनिमेशन स्टूडियो, लाइब्रेरी और अन्य कार्यालयों में बड़ी संख्या में छात्र और कर्मचारी मौजूद थे। आग और घने धुएं के कारण कई लोग बाहर निकलने का मौका नहीं पा सके। अब तक इस हादसे में 18 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। सभी घायलों का इलाज किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में चल रहा है। पूरे इलाके में मातम का माहौल है और मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
एनिमेशन सेंटर बना मौत का जाल, गर्मी की छुट्टियों में सीखने पहुंचे थे छात्र

जानकारी के अनुसार इमारत की दूसरी मंजिल पर ‘हेड हूपर्स स्टूडियो’ नाम का एनिमेशन और गेम डिजाइनिंग सेंटर संचालित होता था, जहां प्रोफेशनल प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ छात्रों को भी प्रशिक्षण दिया जाता था। गर्मी की छुट्टियों के कारण यहां सामान्य दिनों की तुलना में अधिक छात्र मौजूद थे। आग लगते ही पूरे भवन में धुआं फैल गया और छात्रों में अफरा-तफरी मच गई। कई छात्र जान बचाने के लिए बाथरूम में छिप गए, जबकि कुछ ने पहली और दूसरी मंजिल से छलांग लगा दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई लोग धुएं के कारण बेहोश हो गए और बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिल पाया। अधिकांश मृतकों की मौत दम घुटने और झुलसने से हुई बताई जा रही है। हादसे में जान गंवाने वालों में अधिकतर छात्र और स्टूडियो के कर्मचारी शामिल हैं।
चारों ओर से बंद थी इमारत, दीवार तोड़कर अंदर पहुंचीं बचाव टीमें
हादसे के बाद सामने आई जानकारी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस इमारत में आग लगी, वह चारों तरफ से लगभग बंद थी। सामने बड़े-बड़े कांच लगे हुए थे और बाहर निकलने का रास्ता बेहद संकरा था। आग लगने के बाद लोग तेजी से बाहर नहीं निकल सके। घना धुआं और तेज लपटें बचाव अभियान में सबसे बड़ी चुनौती बन गईं। दमकल कर्मियों, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों को लोगों तक पहुंचने के लिए इमारत की दीवार तोड़नी पड़ी। कई घंटों तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान हर कमरे, बाथरूम और कोने की तलाशी ली गई। अधिकारियों के मुताबिक बचाव अभियान पूरा कर लिया गया है और सभी कमरों की जांच की जा चुकी है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि भवन में बड़ी मात्रा में लकड़ी का फर्नीचर मौजूद था, जिससे धुआं तेजी से फैला और हालात और भयावह हो गए।
मुख्यमंत्री योगी ने दौरा बीच में छोड़ा, घटनास्थल पहुंचकर दिए सख्त निर्देश

अलीगढ़ के दौरे पर मौजूद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जैसे ही हादसे की जानकारी मिली, उन्होंने अपना कार्यक्रम बीच में ही छोड़ दिया और तुरंत लखनऊ रवाना हो गए। मुख्यमंत्री सीधे घटनास्थल पहुंचे और उसके बाद केजीएमयू जाकर घायलों का हालचाल जाना। उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक कर पूरे मामले की जानकारी ली और उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए। मुख्यमंत्री ने पुलिस महानिदेशक और अपर मुख्य सचिव (गृह) को घटनास्थल का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। उन्होंने साफ कहा कि इस हादसे के लिए जो भी जिम्मेदार होगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने, घायलों के समुचित उपचार और मृतकों के परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक भावुक हुए, बोले- अपनी आंखों से 14 शव देखे
घटनास्थल पर दोपहर से मौजूद उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक हादसे की भयावहता देखकर भावुक हो गए। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं अपनी आंखों से 14 शव देखे हैं। यह कहते हुए उनकी आंखें भर आईं। उन्होंने कहा कि बचाव अभियान पूरी तरह समाप्त हो चुका है और सभी कमरों की जांच कर ली गई है। उन्होंने बताया कि घायलों को तुरंत केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर भेजा गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है। ब्रजेश पाठक ने कहा कि इमारत के भीतर धुएं की मात्रा इतनी अधिक थी कि बचाव दल को अंदर जाने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि सरकार हर पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और घायलों के इलाज में किसी भी प्रकार की कमी नहीं रहने दी जाएगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने जताया शोक, मुआवजे का किया ऐलान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लखनऊ अग्निकांड पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि इस दुखद घटना में जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति उनकी गहरी संवेदनाएं हैं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए अधिकारियों को युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव कार्य जारी रखने के निर्देश दिए। सरकार की ओर से पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है।
विपक्ष ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग

इस दर्दनाक हादसे पर विपक्षी दलों ने भी गहरा दुख व्यक्त किया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि यह अत्यंत दुखद घटना है और इसकी निष्पक्ष एवं ईमानदार जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन बच्चों की जान गई है, वे किसी भी परिवार के हो सकते थे, इसलिए भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी घटना पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी दर्दनाक घटनाएं कई परिवारों की उम्मीदें छीन लेती हैं। उन्होंने सरकार से सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग की। राजनीतिक दलों के साथ-साथ स्थानीय लोगों ने भी सवाल उठाए हैं कि आखिर इस इमारत में अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं थे और नियमित निरीक्षण क्यों नहीं किया गया।
हादसे ने खड़े किए कई सवाल, जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज
लखनऊ का यह अग्निकांड केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल भी खड़े करता है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट हो सकती है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी। जिस प्रकार इमारत चारों ओर से बंद थी, पर्याप्त आपातकालीन निकास नहीं थे और अग्निशमन सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी दिखाई दिए, उससे कई विभागों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि भवन सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता और समय-समय पर निरीक्षण होता, तो शायद इतनी बड़ी जनहानि टाली जा सकती थी। अब पूरे प्रदेश की नजर सरकार द्वारा गठित जांच पर टिकी है। पीड़ित परिवारों को उम्मीद है कि इस दर्दनाक हादसे के दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। लखनऊ का यह अग्निकांड हमेशा उन मासूम छात्रों और कर्मचारियों की दर्दनाक याद दिलाता रहेगा, जो अपने सपनों को साकार करने के लिए उस इमारत में पहुंचे थे, लेकिन जिंदा वापस नहीं लौट सके।

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दानिश अतीक पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 9 सालों से हैं. इस समय वह इनसाइड न्यूज़ 24x7 में बतौर न्यूज़ डिर्टेक्टर और रिपोर्टर का काम कर रहे हैं. इससे पहले दानिश अतीक फोटोप्लेयर न्यूज़ में न्यूज डेस्क पर काम कर चुके हैं. उन्हें राजनीति, क्राइम और खेल पर लिखना बेहद पसंद है. दानिश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं, इन्होंने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई लखनऊ यूनिवर्सिटी से की है.
