CJP आंदोलन: अनशन जारी रखने पर अड़े वांगचुक, पुलिस की सख्ती पर विपक्ष ने जताई नाराज़गी


सीजेपी प्रदर्शनकारियों पर जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े जाने की विपक्षी दलों ने कड़ी आलोचना की है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा है कि ‘ये सरकार नौजवानों और छात्रों पर लाठीचार्ज कर रही है. अगर आपको परीक्षाएं कराना नहीं आता, तो सिंहासन खाली करो, जनता आएगी! ये लोग सत्ता में रहने लायक नहीं हैं!’

Photo : PTI
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सोनम वांगचुक ने एक्स पर एक पत्र साझा कर बताया कि वह अपना अनशन जारी रखे हुए हैं.

जंतर-मंतर से संसद मार्च पर रोक, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई

नई दिल्ली में सोमवार को जंतर-मंतर और उसके आसपास का इलाका उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्र संसद मार्च के लिए निकले। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं, बार-बार हो रहे परीक्षा पत्र लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद की ओर कूच करना चाहते थे। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान बैरिकेडिंग की गई और कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किए जाने के आरोप लगे। सोशल मीडिया पर सामने आए कई वीडियो में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की तथा बल प्रयोग के दृश्य दिखाई दिए, जिसके बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बन गया। इसी बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पत्र साझा कर स्पष्ट किया कि वह अपना अनशन जारी रखेंगे और छात्रों की मांगों के समर्थन में डटे रहेंगे।

विपक्ष का तीखा हमला, राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने उठाए सवाल

छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा सरकार युवाओं के भविष्य के साथ लगातार खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार पेपर लीक होने से करोड़ों छात्र प्रभावित हुए हैं, लेकिन दोषियों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। राहुल गांधी ने कहा कि जब छात्र अपने अधिकारों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग लेकर सड़कों पर उतरते हैं तो उन्हें लाठियां और हिरासत मिलती है, जबकि पेपर लीक के जिम्मेदार लोग खुलेआम घूम रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यदि सरकार परीक्षाएं निष्पक्ष तरीके से नहीं करा सकती तो उसे सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी कहा कि सरकार को छात्रों पर बल प्रयोग करने के बजाय अपनी नीतियों और शिक्षा व्यवस्था की विफलताओं की समीक्षा करनी चाहिए।

 वाम दलों, आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी ने भी जताया विरोध

छात्र आंदोलन के समर्थन में वामपंथी दलों और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी केंद्र सरकार की आलोचना की। भाकपा (माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि छात्रों का संसद मार्च लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रतीक है और सरकार का रवैया असंवेदनशील तथा अहंकारी दिखाई देता है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कथित लाठीचार्ज की निंदा करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था को संकट में डालने वाले लोग पुलिस सुरक्षा के पीछे छिपे हुए हैं। आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता आतिशी ने छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल को बेहद क्रूर बताया और कहा कि यदि युवाओं की मांगों को लगातार नजरअंदाज किया गया तो इसका राजनीतिक असर सरकार को भुगतना पड़ेगा। पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर, करोल बाग और कनॉट प्लेस जैसे इलाकों में भारी भीड़ थी, इंटरनेट सेवाओं पर भी असर पड़ा और प्रदर्शनकारियों को संसद तक जाने से रोका गया। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष एवं सांसद अखिलेश यादव ने भी कहा कि छात्रों और युवाओं के साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, वह सरकार की बड़ी विफलता को दर्शाता है।

राजद समेत अन्य नेताओं ने संवाद की कमी को बताया सबसे बड़ी समस्या

राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा ने कहा कि छात्रों की मांगें किसी असंभव चीज की नहीं थीं, बल्कि वे केवल सरकार से संवाद चाहते थे। उनके अनुसार लोकतंत्र में संवाद सबसे बड़ा माध्यम होता है, लेकिन सरकार ने बातचीत के बजाय सख्ती का रास्ता अपनाया। विपक्षी नेताओं का कहना है कि शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दे आज देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़े हैं। ऐसे में यदि छात्र अपनी आवाज उठाते हैं तो उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। कई नेताओं ने यह भी कहा कि बार-बार पेपर लीक और परीक्षा विवादों ने युवाओं का भरोसा कमजोर किया है, जिससे व्यापक असंतोष पैदा हुआ है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार इस असंतोष का समाधान निकालने के बजाय कानून-व्यवस्था का हवाला देकर आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है।

दिल्ली पुलिस की सफाई, अफवाहों से बचने की अपील

छात्रों पर बल प्रयोग के आरोपों के बीच दिल्ली पुलिस ने अपना पक्ष भी रखा। दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (जनसंपर्क) राजीव रंजन ने कहा कि पुलिस का उद्देश्य केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी अप्रिय घटना को रोकना है। उन्होंने सभी प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करने, पुलिस के वैध निर्देशों का पालन करने और किसी भी हिंसक या गैरकानूनी गतिविधि से दूर रहने की अपील की। साथ ही उन्होंने लोगों से सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों, भ्रामक सूचनाओं और अपुष्ट वीडियो पर भरोसा न करने तथा केवल आधिकारिक स्रोतों से जानकारी लेने का आग्रह किया। हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल कई वीडियो में पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को रोकने और बल प्रयोग किए जाने के दृश्य सामने आने के बाद इस कार्रवाई पर सवाल लगातार उठ रहे हैं। विपक्षी दल इन वीडियो को सरकार के रवैये का प्रमाण बता रहे हैं, जबकि पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।

नड्डा से बैठक बेनतीजा, आंदोलन जारी रखने का ऐलान

इस बीच प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल के सदस्य सौरव दास ने बताया कि उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत सभी प्रमुख मांगें सरकार के सामने रखीं। उनके अनुसार मंत्री ने इन मांगों पर उचित स्तर पर चर्चा कराने का आश्वासन दिया, लेकिन कोई ठोस निर्णय या समयसीमा नहीं दी गई। सौरव दास ने यह भी कहा कि उन्हें यह भरोसा दिलाया गया कि जंतर-मंतर और आसपास आगे पुलिस कार्रवाई नहीं होगी, हालांकि शाम तक उन्हें सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई। दूसरी ओर, जेपी नड्डा ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि प्रदर्शनकारियों के साथ सौहार्दपूर्ण वातावरण में विस्तृत बातचीत हुई और उन्होंने आंदोलन समाप्त कर सामान्य स्थिति बहाल करने की अपील की। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे और केरल हाउस के पास विरोध प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान किया। इस पूरे घटनाक्रम ने छात्र आंदोलन, शिक्षा व्यवस्था और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है।

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दानिश अतीक पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 9 सालों से हैं. इस समय वह इनसाइड न्यूज़ 24x7 में बतौर न्यूज़ डिर्टेक्टर और रिपोर्टर का काम कर रहे हैं. इससे पहले दानिश अतीक फोटोप्लेयर न्यूज़ में न्यूज डेस्क पर काम कर चुके हैं. उन्हें राजनीति, क्राइम और खेल पर लिखना बेहद पसंद है. दानिश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं, इन्होंने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई लखनऊ यूनिवर्सिटी से की है.


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