16 साल बाद ललित मोदी का बड़ा दावा
आईपीएल के पूर्व चेयरमैन Lalit Modi ने 2010 के चर्चित कोच्चि टस्कर्स केरल फ्रेंचाइजी विवाद को लेकर 16 साल बाद कई बड़े दावे किए हैं। एक हालिया इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि जब उन्होंने कोच्चि फ्रेंचाइजी की बोली प्रक्रिया और उससे जुड़े स्वामित्व ढांचे पर सवाल उठाए थे, तब उनके खिलाफ राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर माहौल बनाया गया। ललित मोदी का कहना है कि उस समय उन्होंने केवल संभावित अनियमितताओं को उजागर करने की कोशिश की थी, लेकिन इसके बाद उन्हें विभिन्न स्तरों पर दबाव और विरोध का सामना करना पड़ा। उनके इन बयानों ने एक बार फिर उस विवाद को सुर्खियों में ला दिया है, जिसने भारतीय क्रिकेट और राजनीति दोनों में हलचल मचा दी थी।
सोनिया गांधी और थरूर का जिक्र
समाचार एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में ललित मोदी ने दावा किया कि उस समय तत्कालीन केंद्रीय मंत्री Shashi Tharoor को कांग्रेस नेतृत्व का समर्थन प्राप्त था। जब उनसे पूछा गया कि थरूर के पीछे कौन खड़ा था, तो उन्होंने सीधे तौर पर Sonia Gandhi का नाम लिया। मोदी ने यह भी आरोप लगाया कि उस दौर में उन पर कई प्रभावशाली नेताओं की ओर से दबाव बनाया गया। उन्होंने कहा कि उन्हें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Ahmed Patel और पूर्व राष्ट्रपति Pranab Mukherjee के फोन आते थे। इसके अलावा उन्होंने Rajeev Shukla का भी उल्लेख करते हुए कहा कि विभिन्न लोगों द्वारा उन्हें अलग-अलग सुझाव और संदेश दिए जाते थे। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
क्या था कोच्चि टस्कर्स विवाद?
साल 2010 में आईपीएल की नई टीम Kochi Tuskers Kerala की बोली और उसके स्वामित्व ढांचे को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। उस समय ललित मोदी ने सोशल मीडिया पर कुछ दस्तावेज साझा किए थे, जिनमें Sunanda Pushkar को कथित तौर पर “स्वेट इक्विटी” मिलने का मुद्दा सामने आया था। इसके बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया और विपक्ष ने मामले को लेकर सवाल उठाए। विवाद बढ़ने पर शशि थरूर को केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। हालांकि, थरूर ने हमेशा किसी भी प्रकार की अनियमितता से इनकार किया और कहा कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया। यह मामला उस समय क्रिकेट, राजनीति और कारोबारी हितों के कथित संबंधों को लेकर राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया था।
फिर चर्चा में पुराना मामला
ललित मोदी के नए दावों ने एक बार फिर उस पुराने विवाद को राजनीतिक और सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में ला दिया है। मोदी का कहना है कि कोच्चि फ्रेंचाइजी से जुड़े मुद्दों को उठाने की वजह से उन्हें आईपीएल और भारतीय क्रिकेट प्रशासन से बाहर कर दिया गया। वहीं, उनके आरोपों पर अब तक कांग्रेस या संबंधित नेताओं की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह मामला फिलहाल केवल आरोप और प्रत्यारोप के स्तर पर ही बना हुआ है। फिर भी, 2010 के इस बहुचर्चित विवाद का दोबारा चर्चा में आना यह दिखाता है कि भारतीय क्रिकेट और राजनीति से जुड़े पुराने विवाद समय-समय पर नए दावों के साथ फिर सुर्खियों में लौट आते हैं।
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दानिश अतीक पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 9 सालों से हैं. इस समय वह इनसाइड न्यूज़ 24x7 में बतौर न्यूज़ डिर्टेक्टर और रिपोर्टर का काम कर रहे हैं. इससे पहले दानिश अतीक फोटोप्लेयर न्यूज़ में न्यूज डेस्क पर काम कर चुके हैं. उन्हें राजनीति, क्राइम और खेल पर लिखना बेहद पसंद है. दानिश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं, इन्होंने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई लखनऊ यूनिवर्सिटी से की है.

