लखनऊ के विकासनगर इलाके में बुधवार शाम लगी भीषण आग ने एक बड़ी मानवीय त्रासदी को जन्म दे दिया। इस हादसे में 250 से अधिक झोपड़ियां जलकर राख हो गईं, जबकि दो मासूम बहनों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में एक बच्ची की उम्र महज 2 साल और दूसरी की सिर्फ 2 महीने बताई जा रही है। गुरुवार सुबह जब हालात सामान्य हुए, तो घटनास्थल पर चारों ओर सिर्फ राख, जले हुए सामान और तबाही का मंजर नजर आया।

आग से प्रभावित परिवारों के सामने अब सिर छुपाने का भी संकट खड़ा हो गया है। कई लोग पूरी रात खुले आसमान के नीचे गुजारने को मजबूर रहे। प्रशासन ने कुछ परिवारों को रात में ही नजदीकी रैन बसेरों में शिफ्ट किया, लेकिन बड़ी संख्या में लोग पास के खाली प्लॉट में ही रात बिताने को विवश रहे। गुरुवार सुबह ये बेघर परिवार अपनी जली हुई झोपड़ियों के अवशेषों में से बचा-खुचा सामान तलाशते नजर आए।

DCP दीक्षा शर्मा ने बताया-
आग लगने की सूचना पर जिले के सभी फायर स्टेशन से दमकल की गाड़ियां मौके पर बुला ली गई थीं। राहत और बचाव कार्य कल से किया जा रहा। SDRF-NDRF की टीमें लगाई गई थीं। दो बच्चियों की डेड बॉडी मिली है। उनके पैरेंट्स से पहचान कराई जा रही है।
पीड़ित महिलाओं ने रोते-बिलखते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि इलाके के कुछ कोठी मालिकों ने उनकी झोपड़ियों में जानबूझकर आग लगवाई। महिलाओं के अनुसार, उन्हें पहले धमकी दी गई थी कि झोपड़ियां खाली कर दें, नहीं तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। आरोप है कि जब उन्होंने झोपड़ियां हटाने से इनकार कर दिया, तो उनके घरों को आग के हवाले कर दिया गया। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है और पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
पीड़ितों ने यह भी बताया कि उनकी जिंदगी भर की कमाई इस आग में जलकर राख हो गई। घर में रखा सामान, कपड़े, जरूरी दस्तावेज और नकदी सब कुछ खत्म हो गया। कई लोगों का कहना है कि यदि दमकल विभाग की टीम समय पर पहुंच जाती, तो नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सकता था। फिलहाल, आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है।
घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है। किसी भी संभावित विवाद या बवाल को रोकने के लिए विकासनगर क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिसकर्मी हेलमेट और लाठियों के साथ गश्त कर रहे हैं, ताकि स्थिति नियंत्रण में बनी रहे।
प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा ले रहे हैं और प्रभावित परिवारों की सूची तैयार की जा रही है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि पीड़ितों को कितनी आर्थिक सहायता या राहत दी जाएगी। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से जल्द से जल्द उचित मुआवजा और पुनर्वास की मांग की है।
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर शहर में झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और पुनर्वास के मुद्दे को सामने ला दिया है। फिलहाल, पीड़ित परिवारों को सरकारी मदद का इंतजार है, ताकि वे दोबारा अपने जीवन को पटरी पर ला सकें।
पूरा मामला जानिए-
- राजधानी के पॉश इलाकों में से एक विकासनगर में बुधवार शाम करीब 5.30 बजे लगी आग में 30 से ज्यादा सिलेंडर फटे। आग की चपेट में आकर 250 से अधिक झोपड़ियां जलकर राख हो गईं। करीब 10 किमी. दूर तक धुएं का गुबार दिखाई दिया। आग लगने के बाद एहतियातन आसपास के 20 मकानों को खाली कराया गया।
- फायर ब्रिगेड की 20 गाड़ियों ने करीब 5 घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इस दौरान इलाके की बिजली काट दी गई। लखनऊ से सांसद और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीएम विशाख जी. को फोन कर घटना की जानकारी ली। वहीं, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक भी मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया।
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दानिश अतीक पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 9 सालों से हैं. इस समय वह इनसाइड न्यूज़ 24x7 में बतौर न्यूज़ डिर्टेक्टर और रिपोर्टर का काम कर रहे हैं. इससे पहले दानिश अतीक फोटोप्लेयर न्यूज़ में न्यूज डेस्क पर काम कर चुके हैं. उन्हें राजनीति, क्राइम और खेल पर लिखना बेहद पसंद है. दानिश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं, इन्होंने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई लखनऊ यूनिवर्सिटी से की है.

