अलीगंज अग्निकांड के बाद अवैध कॉम्प्लेक्स पर चला बुलडोज़र का काउंटडाउन। एलडीए के आदेश पर अपील नहीं, सामान खाली; वीरेंद्र शुक्ल के एक और कॉम्प्लेक्स पर भी कार्रवाई की तैयारी।

अवैध कॉम्प्लेक्स पर ध्वस्तीकरण की उल्टी गिनती शुरू
लखनऊ के अलीगंज स्थित उस अवैध व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है, जहां 22 जून को भीषण आग लगने से 15 युवाओं की दर्दनाक मौत हो गई थी। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) द्वारा जारी ध्वस्तीकरण आदेश के खिलाफ अब तक आरोपी वीरेंद्र शुक्ल और सुरेंद्र शुक्ल ने मंडलायुक्त न्यायालय में कोई अपील दाखिल नहीं की है। ऐसे में माना जा रहा है कि जल्द ही एलडीए इस अवैध निर्माण को गिराने की कार्रवाई शुरू कर सकता है। इस बीच, आग में क्षतिग्रस्त कॉम्प्लेक्स के शोरूमों से दुकानदार और अन्य लोग अपना सामान बाहर निकालने में जुटे हैं। वहीं, वीरेंद्र शुक्ल के अलीगंज स्थित एक अन्य अवैध व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स को दी गई नोटिस की समयसीमा भी पूरी हो चुकी है, जिस पर भी जल्द ध्वस्तीकरण आदेश जारी होने की संभावना है।
ध्वस्तीकरण आदेश में देरी पर उठे सवाल
अलीगंज अग्निकांड के बाद एलडीए ने 23 जून को अवैध कॉम्प्लेक्स पर नोटिस चस्पा करते हुए स्वीकृत मानचित्र प्रस्तुत करने के लिए 15 दिन का समय दिया था। आरोपी वीरेंद्र शुक्ल के जेल में होने के कारण नोटिस वहीं तामील कराई गई। यह अवधि 7 जुलाई को समाप्त हो गई, लेकिन विहित न्यायालय ने ध्वस्तीकरण का आदेश 10 जुलाई को जारी किया। विशेषज्ञों और जानकारों का कहना है कि निर्धारित समयसीमा पूरी होने के बाद यदि कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया था, तो 7 जुलाई को ही ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया जा सकता था। आदेश जारी करने में हुई चार दिन की देरी को लेकर एलडीए और विहित अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
अब अपील नहीं, कार्रवाई का इंतजार
ध्वस्तीकरण आदेश जारी होने के बाद विहित न्यायालय ने भवन मालिकों को अवैध निर्माण स्वयं हटाने के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय भी दिया है। हालांकि नियमों के अनुसार एलडीए चाहे तो यह अतिरिक्त समय दिए बिना स्वयं भी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर सकता था। अब तक वीरेंद्र शुक्ल और सुरेंद्र शुक्ल की ओर से मंडलायुक्त न्यायालय में किसी प्रकार की अपील दाखिल नहीं की गई है, जिससे प्रशासनिक कार्रवाई का रास्ता लगभग साफ माना जा रहा है। दूसरी ओर, कॉम्प्लेक्स से लगातार सामान बाहर निकाला जा रहा है, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कभी भी शुरू हो सकती है। इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल अवैध निर्माणों पर प्रशासन की कार्रवाई को लेकर बहस तेज कर दी है, बल्कि भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के लिए जवाबदेही तय करने की मांग भी जोर पकड़ रही है।
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दानिश अतीक पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 9 सालों से हैं. इस समय वह इनसाइड न्यूज़ 24x7 में बतौर न्यूज़ डिर्टेक्टर और रिपोर्टर का काम कर रहे हैं. इससे पहले दानिश अतीक फोटोप्लेयर न्यूज़ में न्यूज डेस्क पर काम कर चुके हैं. उन्हें राजनीति, क्राइम और खेल पर लिखना बेहद पसंद है. दानिश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं, इन्होंने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई लखनऊ यूनिवर्सिटी से की है.
