
लखनऊ। राजधानी लखनऊ स्थित अटल बिहारी वाजपेयी इकाना क्रिकेट स्टेडियम एक बार फिर प्रशासनिक जांच के दायरे में आ गया है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने स्टेडियम प्रबंधन पर अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन के आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। एलडीए का कहना है कि सरकारी जमीन पर विकसित और संचालित होने वाले किसी भी प्रतिष्ठान को तय नियमों और शर्तों का पालन करना अनिवार्य है। प्रारंभिक स्तर पर मिली शिकायतों और विभिन्न विभागों की रिपोर्टों के आधार पर यह कदम उठाया गया है। जांच के बाद यह तय होगा कि स्टेडियम प्रबंधन ने किन शर्तों का उल्लंघन किया है और उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की जानी चाहिए।

हाउस टैक्स और कचरा प्रबंधन को लेकर उठे सवाल
एलडीए की जांच के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। हाल ही में लखनऊ नगर निगम ने इकाना स्टेडियम प्रबंधन को लगभग 28.42 करोड़ रुपये के बकाया हाउस टैक्स को लेकर नोटिस जारी किया था। नगर निगम का आरोप था कि कई बार नोटिस दिए जाने के बावजूद टैक्स का भुगतान नहीं किया गया। इसके चलते सीलिंग जैसी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी। वहीं, प्रसिद्ध पंजाबी गायक दिलजीत दोसांझ के कॉन्सर्ट के बाद स्टेडियम परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भारी मात्रा में कचरा फैलने की शिकायतें सामने आई थीं। नगर निगम ने कचरा प्रबंधन नियमों के उल्लंघन को गंभीर मानते हुए स्टेडियम प्रबंधन पर पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। इन घटनाओं ने प्रशासन का ध्यान स्टेडियम की व्यवस्थाओं और अनुबंध अनुपालन की ओर आकर्षित किया।
अनुबंध की शर्तों के पालन की होगी विस्तृत समीक्षा
सूत्रों के अनुसार, एलडीए और स्टेडियम प्रबंधन के बीच हुए अनुबंध में कई महत्वपूर्ण शर्तें शामिल हैं। इनमें नियमित रूप से करों का भुगतान, साफ-सफाई बनाए रखना, कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था, पार्किंग प्रबंधन तथा पर्यावरणीय मानकों का पालन प्रमुख हैं। इसके अलावा सरकारी भूमि का उपयोग केवल स्वीकृत गतिविधियों के लिए किए जाने की भी शर्त है। एलडीए द्वारा गठित समिति इन सभी पहलुओं की गहन जांच करेगी। यदि किसी प्रकार की अनियमितता या अनुबंध उल्लंघन पाया जाता है तो प्राधिकरण अनुबंध की शर्तों के अनुसार कार्रवाई कर सकता है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह तथ्यात्मक आधार पर होगी और रिपोर्ट के आधार पर ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।

पहले भी विवादों में रह चुका है इकाना स्टेडियम
यह पहला अवसर नहीं है जब इकाना स्टेडियम किसी विवाद के कारण सुर्खियों में आया हो। इससे पहले राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने भी पर्यावरणीय नियमों और भूजल दोहन संबंधी मामलों में देश के छह बड़े स्टेडियमों को नोटिस जारी किया था, जिनमें इकाना स्टेडियम भी शामिल था। एनजीटी ने संबंधित प्रबंधन से जवाब मांगा था कि निर्धारित पर्यावरणीय मानकों का पालन क्यों नहीं किया गया। स्टेडियम में आयोजित होने वाले बड़े खेल आयोजनों, कॉन्सर्ट और अन्य कार्यक्रमों के दौरान पर्यावरणीय प्रभाव, जल उपयोग और कचरा प्रबंधन जैसे मुद्दे लगातार चर्चा का विषय रहे हैं। ऐसे में एलडीए की मौजूदा जांच को भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसके निष्कर्ष भविष्य में स्टेडियम संचालन से जुड़े नियमों को और सख्त बना सकते हैं।
स्टेडियम प्रबंधन का पक्ष और क्रिकेट प्रेमियों की नजर रिपोर्ट पर
दूसरी ओर, इकाना स्टेडियम के जनसंपर्क अधिकारी गौरव ने स्पष्ट किया है कि एलडीए द्वारा गठित समिति केवल इकाना स्टेडियम के लिए नहीं बनाई गई है। उनके अनुसार, लखनऊ शहर की कई इमारतों, परियोजनाओं, होटलों और अन्य प्रतिष्ठानों का सर्वेक्षण करने के लिए यह समिति बनाई गई है, जिसका उद्देश्य सुविधाओं और नियमों के अनुपालन की स्थिति का मूल्यांकन करना है। उन्होंने कहा कि इकाना भी इस व्यापक सर्वेक्षण का हिस्सा है। गौरतलब है कि इकाना स्टेडियम उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा क्रिकेट मैदान है और यह आईपीएल टीम लखनऊ सुपर जायंट्स का घरेलू मैदान भी है। यहां कई अंतरराष्ट्रीय मुकाबले और प्रमुख खेल आयोजन हो चुके हैं। ऐसे में जांच की खबर से क्रिकेट प्रशंसकों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि एलडीए अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच का उद्देश्य स्टेडियम को बंद करना नहीं, बल्कि नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। अब सभी की निगाहें समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो अगले 15 दिनों में सामने आ सकती है और जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
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दानिश अतीक पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 9 सालों से हैं. इस समय वह इनसाइड न्यूज़ 24x7 में बतौर न्यूज़ डिर्टेक्टर और रिपोर्टर का काम कर रहे हैं. इससे पहले दानिश अतीक फोटोप्लेयर न्यूज़ में न्यूज डेस्क पर काम कर चुके हैं. उन्हें राजनीति, क्राइम और खेल पर लिखना बेहद पसंद है. दानिश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं, इन्होंने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई लखनऊ यूनिवर्सिटी से की है.
