
राजस्थान रॉयल्स की 15,600 करोड़ रुपये की बड़ी बिक्री डील कानूनी विवाद में फंसती नजर आ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, काल सोमानी समूह इस सौदे के खिलाफ कानूनी कदम उठाने की तैयारी में है। दूसरी ओर, लक्ष्मी मित्तल परिवार और अदार पूनावाला ने फ्रेंचाइजी में बड़ी हिस्सेदारी खरीदने की पुष्टि की है।
राजस्थान रॉयल्स की मालिकाना हिस्सेदारी को लेकर हुआ 15,600 करोड़ रुपये का हाई-प्रोफाइल सौदा अब बड़े कानूनी तूफान की आहट दे रहा है। क्रिकेट जगत में सनसनी मचाने वाली इस डील पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और मामला अब अदालत की चौखट तक पहुंच सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश के दिग्गज उद्योगपति लक्ष्मी एन. मित्तल, उनके बेटे आदित्य मित्तल और सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला ने मिलकर आईपीएल फ्रेंचाइजी राजस्थान रॉयल्स में बहुमत हिस्सेदारी खरीद ली है। लेकिन इस चमकदार सौदे के पीछे की कहानी अब विवादों और आरोपों से घिरती नजर आ रही है।

सूत्रों के हवाले से सामने आया है कि इस रेस में पहले से शामिल काल सोमानी समूह इस पूरे घटनाक्रम से बेहद नाराज है और कानूनी लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार हो चुका है। समूह के करीबी सूत्रों ने साफ कहा है कि अमेरिका में उनकी लीगल और पीआर टीम एक्टिव हो चुकी है और जल्द ही एक बड़ा कानूनी नोटिस जारी किया जाएगा। इतना ही नहीं, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को भी इस मामले में औपचारिक शिकायत भेजने की तैयारी है। यह संकेत साफ हैं कि आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने वाला है।

सोमानी समूह ने इस डील की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि सौदे के दौरान कई अहम जानकारियां साझा नहीं की गईं। खासतौर पर बीसीसीआई के बकाया भुगतान, लंबित कानूनी मामलों और वित्तीय स्थिति को लेकर पूछे गए सवालों का कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। सूत्रों के अनुसार, समूह पिछले 10 दिनों से डील को फाइनल करने के लिए तैयार था, लेकिन जानबूझकर प्रक्रिया को धीमा किया गया और समानांतर रूप से दूसरे पक्ष के साथ बातचीत जारी रखी गई। यह आरोप इस पूरे सौदे की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहे हैं।

वहीं, मित्तल परिवार की ओर से जारी प्रेस रिलीज में साफ कहा गया है कि डील पूरी तरह से फाइनल हो चुकी है। नई संरचना के अनुसार, करीब 75 प्रतिशत हिस्सेदारी मित्तल परिवार के पास होगी, जबकि अदार पूनावाला के पास लगभग 18 प्रतिशत हिस्सेदारी रहेगी। बाकी 7 प्रतिशत हिस्सेदारी मौजूदा निवेशकों के पास ही रहेगी, जिनमें मनोज बादाले भी शामिल हैं। हालांकि, विवाद के बीच इस प्रेस रिलीज की टाइमिंग भी चर्चा का विषय बन गई है।
नई बोर्ड संरचना भी काफी ताकतवर मानी जा रही है, जिसमें लक्ष्मी मित्तल, आदित्य मित्तल, वनीशा मित्तल-भाटिया, अदार पूनावाला और मनोज बादाले शामिल होंगे। खास बात यह है कि मनोज बादाले भविष्य में भी टीम के साथ जुड़े रहेंगे, जो इस ट्रांजिशन को स्थिरता देने की कोशिश मानी जा रही है।
फिलहाल, यह मामला सिर्फ एक कारोबारी डील नहीं रह गया है, बल्कि पारदर्शिता, भरोसे और नियमों के पालन पर बड़ा सवाल बन गया है। अगर सोमानी समूह अपने दावों के साथ आगे बढ़ता है, तो यह विवाद आईपीएल के इतिहास के सबसे बड़े कानूनी संघर्षों में से एक बन सकता है। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि बीसीसीआई और संबंधित पक्ष इस बढ़ते विवाद पर क्या रुख अपनाते हैं।
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लक्ष्मी मित्तल ने कहा, ‘मुझे क्रिकेट से प्यार है और मेरा परिवार राजस्थान से है, इसलिए राजस्थान रॉयल्स से बेहतर कोई आईपीएल टीम नहीं हो सकती जिसका मैं हिस्सा बनूं।’
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आदित्य मित्तल ने कहा, ‘रॉयल्स नई प्रतिभाओं को निखारने के लिए जानी जाती है और हम इस विरासत को आगे बढ़ाएंगे।’
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अदार पूनावाला ने कहा, ‘राजस्थान रॉयल्स एक शानदार विरासत वाली फ्रेंचाइजी है और मैं इसके भविष्य का हिस्सा बनकर खुश हूं।’
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दानिश अतीक पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 9 सालों से हैं. इस समय वह इनसाइड न्यूज़ 24x7 में बतौर न्यूज़ डिर्टेक्टर और रिपोर्टर का काम कर रहे हैं. इससे पहले दानिश अतीक फोटोप्लेयर न्यूज़ में न्यूज डेस्क पर काम कर चुके हैं. उन्हें राजनीति, क्राइम और खेल पर लिखना बेहद पसंद है. दानिश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं, इन्होंने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई लखनऊ यूनिवर्सिटी से की है.
