
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर को लेकर पिछले कुछ समय से चल रहा विवाद अब एक बड़े प्रशासनिक फैसले के साथ नए मोड़ पर पहुंच गया है। लखनऊ समेत प्रदेश के कई जिलों में जनता ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था। आम उपभोक्ताओं का आरोप था कि इन मीटरों के कारण उनकी बिजली खपत का खर्च अचानक बढ़ गया है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ रहा है। सड़कों पर उतरी जनता ने सरकार से इस व्यवस्था को तुरंत वापस लेने की मांग की थी। इस बढ़ते असंतोष और राजनीतिक दबाव के बीच सरकार को आखिरकार अपने रुख में बदलाव करना पड़ा।

सूत्रों के मुताबिक, बंगाल और असम चुनावों में मिली सफलता के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मुद्दे पर गंभीरता से पुनर्विचार किया। 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले जनता के बीच सकारात्मक संदेश देने के उद्देश्य से इसे एक बड़े “मास्टरस्ट्रोक” के तौर पर देखा जा रहा है।
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा की अध्यक्षता में लखनऊ स्थित शक्ति भवन में ऊर्जा विभाग की हाईलेवल बैठक आयोजित की गई, जिसमें स्मार्ट मीटर व्यवस्था को लेकर अहम निर्णय लिए गए। इस बैठक में अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए कि उपभोक्ताओं को राहत देना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
बैठक के बाद सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए स्मार्ट प्रीपेड मीटर को पोस्ट-पेड व्यवस्था की तरह संचालित करने का ऐलान किया है। इसका मतलब है कि अब उपभोक्ताओं को पहले की तरह हर महीने बिजली का बिल मिलेगा और उन्हें अग्रिम भुगतान (प्रीपेड) की बाध्यता से राहत मिल जाएगी। नई व्यवस्था के तहत 1 से 30 तारीख तक की बिजली खपत का बिल अगले 10 दिनों के भीतर उपभोक्ताओं को भेजा जाएगा। इसके साथ ही बिल की जानकारी SMS और WhatsApp के माध्यम से भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि उपभोक्ता समय पर भुगतान कर सकें।
सरकार ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपने मोबाइल नंबर अपडेट कराएं और भेजे जाने वाले संदेशों पर ध्यान दें। एक और राहत देते हुए यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी उपभोक्ता की बिजली आपूर्ति महीने के भीतर नहीं काटी जाएगी। वहीं, जिन उपभोक्ताओं पर बकाया बिल है, उन्हें इसे 10 आसान किश्तों में चुकाने की सुविधा दी जाएगी। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा, फिलहाल पुराने मीटरों को बदलने की प्रक्रिया को भी स्थगित कर दिया गया है। सरकार ने यह भी निर्देश दिए हैं कि नए स्मार्ट मीटर से जुड़ी सभी शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए। गर्मी के मौसम को देखते हुए बिजली संकट से बचाव के लिए भी अधिकारियों को विशेष निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
कुल मिलाकर, जनता के भारी विरोध के बाद सरकार का यह यू-टर्न एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। स्मार्ट मीटर विवाद पर लिया गया यह फैसला न केवल उपभोक्ताओं को तत्काल राहत देगा, बल्कि आगामी चुनावों के मद्देनजर सरकार की रणनीति का भी अहम हिस्सा माना जा रहा है।
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दानिश अतीक पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 9 सालों से हैं. इस समय वह इनसाइड न्यूज़ 24x7 में बतौर न्यूज़ डिर्टेक्टर और रिपोर्टर का काम कर रहे हैं. इससे पहले दानिश अतीक फोटोप्लेयर न्यूज़ में न्यूज डेस्क पर काम कर चुके हैं. उन्हें राजनीति, क्राइम और खेल पर लिखना बेहद पसंद है. दानिश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं, इन्होंने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई लखनऊ यूनिवर्सिटी से की है.
