ओमेक्स रेजिडेंसी द्वारा तथ्यों को छुपा कर गलत तरीके से LDA से अपना नक्शा पास कराया, ओमैक्स पर सड़क और नाले पर कब्जे का आरोप, फूटा जनाक्रोश! 60 फीट सार्वजनिक मार्ग बंद होने पर सरसवां-अर्जुनगंज के हजारों निवासी सड़क पर उतरे


स्थानीय निवासियों ने एलडीए से स्वीकृत मानचित्र की जांच, कथित अतिक्रमण हटाने और सार्वजनिक मार्ग को तत्काल बहाल करने की मांग की

एलडीए निर्मित सार्वजनिक मार्ग को लेकर शुरू हुआ नया विवाद

लखनऊ के सरसवां, अर्जुनगंज, सरस्वतीपुरम, लल्लन सिंह नगर और आदर्श नगर क्षेत्रों में स्थित एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक मार्ग को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। क्षेत्रीय निवासियों ने ओमैक्स रेजिडेंसी आर-1 पर आरोप लगाया है कि कंपनी ने कथित रूप से तथ्यों को छिपाकर लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) से मानचित्र स्वीकृत कराया और बाद में सार्वजनिक उपयोग की 60 फीट चौड़ी सड़क तथा उससे जुड़े नाले पर कब्जा करने का प्रयास किया। इस मुद्दे को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है और उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन द्वारा शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो व्यापक स्तर पर आंदोलन और धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह सड़क सुल्तानपुर रोड से होकर गोमती नगर विस्तार सेक्टर-7 और पुलिस मुख्यालय की दिशा में जाने वाले प्रमुख मार्गों में से एक है, इसलिए इसका बंद होना हजारों लोगों की दैनिक आवाजाही को प्रभावित कर रहा है।


आरटीआई और एलडीए अभिलेखों के आधार पर सड़क निर्माण का दावा

स्थानीय नागरिकों के अनुसार यह सड़क और जल निकासी नाला पूर्व में एलडीए द्वारा विधिवत निर्मित कराया गया था। निवासियों ने वर्ष 2017 में सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त दस्तावेजों का हवाला देते हुए दावा किया है कि एलडीए ने इस सड़क के निर्माण को स्वीकृति प्रदान की थी। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार सड़क निर्माण पर लगभग 1.43 करोड़ रुपये की लागत व्यय की गई थी तथा इसका कम्प्लीशन प्लान भी एलडीए के रिकॉर्ड में दर्ज है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि जब यह मार्ग सार्वजनिक धन से निर्मित हुआ और वर्षों से आम जनता के उपयोग में रहा है, तब किसी निजी संस्था द्वारा इस पर स्वामित्व या नियंत्रण का दावा करना न्यायोचित नहीं माना जा सकता। निवासियों का आरोप है कि सड़क और नाले को क्षतिग्रस्त किए जाने के कारण क्षेत्र में जलभराव की समस्या लगातार बढ़ी है और आवागमन भी बाधित हुआ है।


खसरा संख्या और मानचित्र स्वीकृति को लेकर उठे गंभीर सवाल

विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू भूमि अभिलेखों और स्वीकृत मानचित्र में दर्ज खसरा संख्या को लेकर सामने आया है। स्थानीय लोगों का दावा है कि सार्वजनिक मार्ग का खसरा संख्या 497 (प) के रूप में राजस्व अभिलेखों और शासनादेश संख्या 1248/2013 में दर्ज है, जबकि ओमैक्स रेजिडेंसी के बैनामे में खसरा संख्या 497 (स) अंकित है। निवासियों का आरोप है कि इसके बावजूद स्वीकृत मानचित्र में केवल खसरा संख्या 497 अंकित कर अधिकारियों को भ्रमित किया गया। उनका कहना है कि यदि सार्वजनिक मार्ग और निजी भूमि की सीमाओं को स्पष्ट रूप से अलग-अलग दर्शाया जाता तो वर्तमान विवाद की स्थिति उत्पन्न नहीं होती। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि एलडीए द्वारा स्वीकृत मूल एवं संशोधित मानचित्रों की स्वतंत्र तकनीकी और प्रशासनिक जांच कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि स्वीकृति प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है या नहीं।


जनप्रतिनिधियों ने भी उठाए सवाल, कई स्तरों पर हुआ पत्राचार

इस मामले को लेकर बीते कुछ वर्षों में कई जनप्रतिनिधियों ने शासन और प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। विधायक Rajeshwar Singh द्वारा वर्ष 2023 में प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन विभाग को पत्र भेजकर मामले की जांच कराने की मांग की गई थी। निरीक्षण रिपोर्ट में सड़क और नाले के क्षतिग्रस्त होने का उल्लेख किया गया था। इसके बाद विधायक Pankaj Malik ने भी विधानसभा के माध्यम से इस सड़क के निर्माण और पुनर्स्थापना का मुद्दा उठाया। वहीं मंत्री Dharampal Singh, विधान परिषद सदस्य Surendra Chaudhary, विधायक Jai Devi तथा मंत्री Suresh Khanna द्वारा भी अलग-अलग स्तर पर पत्राचार और शिकायतें दर्ज कराई गईं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने व्यापक राजनीतिक और प्रशासनिक हस्तक्षेप के बावजूद जमीनी स्तर पर समाधान नहीं निकल सका है।


स्थानीय निवासियों का आरोप: वर्षों से जारी है संघर्ष

क्षेत्रवासियों का कहना है कि सार्वजनिक सड़क और नाले को बचाने के लिए उनका संघर्ष नया नहीं है बल्कि वर्ष 2014 से लगातार जारी है। उनका आरोप है कि समय-समय पर संबंधित विभागों को शिकायतें देने, जनप्रतिनिधियों से हस्तक्षेप कराने और दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। निवासियों के अनुसार सड़क बंद होने से न केवल आवागमन प्रभावित हुआ है बल्कि आपातकालीन सेवाओं, स्कूलों, अस्पतालों और आसपास के आवासीय क्षेत्रों तक पहुंच भी कठिन हो गई है। लोगों का कहना है कि यह केवल भूमि विवाद का मामला नहीं बल्कि सार्वजनिक सुविधाओं और नागरिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है। क्षेत्र के कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने भी सार्वजनिक मार्ग को बहाल करने की मांग का समर्थन किया है।


निष्पक्ष जांच और तत्काल निर्माण की मांग, कानून-व्यवस्था पर भी चिंता

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि ओमैक्स रेजिडेंसी के पक्ष में स्वीकृत मानचित्र की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो उसे निरस्त किया जाए। साथ ही सार्वजनिक सड़क और नाले को अतिक्रमणमुक्त कराकर पुलिस बल की मौजूदगी में पुनर्निर्माण कार्य तत्काल शुरू कराया जाए। निवासियों का कहना है कि एलडीए द्वारा सड़क निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है, लेकिन क्षेत्रीय लोगों को आशंका है कि विवाद के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हो सकता है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन शीघ्र और प्रभावी कदम नहीं उठाता तो क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें एलडीए और राज्य सरकार पर टिकी हैं कि वे इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद का समाधान किस प्रकार करते हैं और सार्वजनिक मार्ग को दोबारा बहाल करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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Journalist at Inside News 24x7 | Website | + posts

दानिश अतीक पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 9 सालों से हैं. इस समय वह इनसाइड न्यूज़ 24x7 में बतौर न्यूज़ डिर्टेक्टर और रिपोर्टर का काम कर रहे हैं. इससे पहले दानिश अतीक फोटोप्लेयर न्यूज़ में न्यूज डेस्क पर काम कर चुके हैं. उन्हें राजनीति, क्राइम और खेल पर लिखना बेहद पसंद है. दानिश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं, इन्होंने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई लखनऊ यूनिवर्सिटी से की है.


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