
हरदोई। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में एक निजी स्कूल की प्रिंसिपल और अभिभावक के बीच हुई तीखी बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मामला शहर के सिविल लाइंस क्षेत्र स्थित सनबीम स्कूल का है, जहां स्कूल प्रबंधन पर अभिभावकों को अतिरिक्त कॉपियां और अध्ययन सामग्री खरीदने के लिए दबाव बनाने के आरोप लगे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार यह घटना 24 अप्रैल की बताई जा रही है। वीडियो में स्कूल की प्रिंसिपल ममता मिश्रा एक महिला अभिभावक नीलम वर्मा से तीखे अंदाज में बात करती दिखाई दे रही हैं। वहां मौजूद किसी अन्य अभिभावक ने इस घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जिसे पहले स्कूल के व्हाट्सएप ग्रुप में साझा किया गया। बाद में यह वीडियो सोशल मीडिया पर फैल गया और देखते ही देखते चर्चा का विषय बन गया।
अभिभावक नीलम वर्मा का आरोप है कि उनकी बेटी अलीशा स्कूल के यूकेजी वर्ग में पढ़ती है। उन्होंने बताया कि स्कूल द्वारा पहले से निर्धारित किताबें और अन्य सामग्री वह खरीद चुकी थीं। इसके बावजूद बाद में स्कूल प्रबंधन ने चार अतिरिक्त नोटबुक खरीदने के लिए कहा, जिनकी कीमत करीब 1200 रुपये बताई गई। नीलम वर्मा का कहना है कि इन कॉपियों को केवल स्कूल से ही खरीदने का दबाव बनाया गया।
नीलम वर्मा ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने आर्थिक कारणों से कुछ दिनों का समय मांगा तो उनकी बात सुनने के बजाय प्रिंसिपल नाराज हो गईं। उनका कहना है कि उनकी बेटी को बिना कॉपी के होमवर्क नहीं दिया जा रहा था, जिससे वह परेशान होकर स्कूल पहुंचीं और प्रिंसिपल से 15 दिन की मोहलत मांगी। इस दौरान प्रिंसिपल ने कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग किया, उन्हें अनपढ़ और असंस्कृत कहा तथा बच्ची का नाम स्कूल से काटने की धमकी दी।
नीलम वर्मा ने इस मामले की शिकायत जिलाधिकारी से आईजीआरएस पोर्टल पर की है। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि निजी स्कूल मनमाने तरीके से फीस और अन्य सामान के नाम पर अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डाल रहे हैं।
वहीं, स्कूल की प्रिंसिपल ममता मिश्रा ने इन आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो बयान में कहा कि अभिभावक लगातार फीस कम कराने का दबाव बना रही थीं। घटना वाले दिन स्कूल में वैक्सीनेशन कार्यक्रम चल रहा था और वह व्यस्त थीं। उन्होंने अभिभावक से बाद में बात करने को कहा था, लेकिन वह उसी समय विवाद करने लगीं।
ममता मिश्रा ने कहा कि यदि उनकी भाषा कठोर लगी हो तो इसके पीछे की परिस्थितियां भी समझी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्राथमिक कक्षाओं की फीस मात्र 1300 रुपये है, जो अत्यधिक नहीं कही जा सकती। हालांकि, वीडियो सामने आने के बाद स्कूल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।
इस घटना के बाद जिले के कई अभिभावकों ने निजी स्कूलों की मनमानी पर नाराजगी जताई है। लोगों का कहना है कि कई स्कूल बच्चों की किताबें, कॉपियां, यूनिफॉर्म और अन्य सामग्री केवल तय दुकानों या स्कूल से खरीदने का दबाव बनाते हैं, जिससे अभिभावकों को अधिक कीमत चुकानी पड़ती है। साथ ही फीस वृद्धि और अतिरिक्त शुल्क को लेकर भी लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अजीत सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच के आदेश दे दिए गए हैं। इसके लिए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है, जो पूरे मामले की पड़ताल करेगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी नियम का उल्लंघन या शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल यह मामला केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने निजी शिक्षण संस्थानों की पारदर्शिता, जवाबदेही और अभिभावकों के साथ व्यवहार को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर लोग इस मुद्दे पर खुलकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं और स्कूलों में फीस व अध्ययन सामग्री के नाम पर हो रही कथित मनमानी पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
अब सभी की नजर जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि आरोप कितने सही हैं और प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है।
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दानिश अतीक पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 9 सालों से हैं. इस समय वह इनसाइड न्यूज़ 24x7 में बतौर न्यूज़ डिर्टेक्टर और रिपोर्टर का काम कर रहे हैं. इससे पहले दानिश अतीक फोटोप्लेयर न्यूज़ में न्यूज डेस्क पर काम कर चुके हैं. उन्हें राजनीति, क्राइम और खेल पर लिखना बेहद पसंद है. दानिश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं, इन्होंने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई लखनऊ यूनिवर्सिटी से की है.
