कोलकाता: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े एक ऐतिहासिक नारे के संदर्भ में की गई कथित गलती ने राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। सोमवार को पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले के जॉयपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा” जैसे प्रसिद्ध नारे को स्वामी विवेकानंद से जोड़ दिया। जबकि यह नारा दरअसल नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा दिया गया था। इस बयान के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस बयान के बाद सबसे पहले Sagarika Ghose ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की बंगाल के इतिहास को लेकर “गंभीर अज्ञानता” एक बार फिर उजागर हो गई है। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि यह नारा स्वामी विवेकानंद का नहीं, बल्कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का था, और भाजपा को बंगाल की ऐतिहासिक विरासत को समझने की जरूरत है। तृणमूल कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी ने बंगाल के इतिहास और उसके महान व्यक्तित्वों के प्रति अनादर को दर्शाया है।
इस विवाद में उत्तर प्रदेश की राजनीति भी शामिल हो गई जब Akhilesh Yadav ने योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा। उन्होंने इस घटना का वीडियो साझा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का यह बयान उत्तर प्रदेश की छवि को वैश्विक स्तर पर नुकसान पहुंचाने वाला है। अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि अगर राज्य की बागडोर ऐसे लोगों के हाथ में है, तो प्रदेश के भविष्य को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा से जुड़े लोग स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा नहीं रहे, इसलिए उन्हें इतिहास की सही जानकारी नहीं है।
गौरतलब है कि “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा” का नारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जुलाई 1944 में बर्मा (वर्तमान म्यांमार) में भारतीय राष्ट्रीय सेना (आईएनए) के सैनिकों को संबोधित करते हुए दिया था। यह नारा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे प्रेरणादायक और ऐतिहासिक नारों में से एक माना जाता है, जिसने हजारों युवाओं को देश की आज़ादी के लिए संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया।
योगी आदित्यनाथ अपने भाषणों में अक्सर बंगाल के महान व्यक्तित्वों जैसे Rabindranath Tagore, Bankim Chandra Chattopadhyay और Ramakrishna Paramhansa का उल्लेख करते रहे हैं। हालांकि, इस ताज़ा विवाद ने उनके ऐतिहासिक संदर्भों की सटीकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल में इस तरह की टिप्पणियां विपक्ष को हमला करने का अवसर देती हैं और इससे राजनीतिक बहस और भी तेज हो जाती है। फिलहाल, इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ दल की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है, लेकिन विपक्ष लगातार इस मामले को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है।
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दानिश अतीक पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 9 सालों से हैं. इस समय वह इनसाइड न्यूज़ 24x7 में बतौर न्यूज़ डिर्टेक्टर और रिपोर्टर का काम कर रहे हैं. इससे पहले दानिश अतीक फोटोप्लेयर न्यूज़ में न्यूज डेस्क पर काम कर चुके हैं. उन्हें राजनीति, क्राइम और खेल पर लिखना बेहद पसंद है. दानिश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं, इन्होंने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई लखनऊ यूनिवर्सिटी से की है.

